MP राज्यसभा चुनाव: निर्वाचन प्रक्रिया में दखल से SC का इनकार, क्या HC जाएंगी मीनाक्षी नटराजन?
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव : निर्वाचन प्रक्रिया में दखल से सुप्रीम कोर्ट ने मना किया, मीनाक्षी नटराजन के पास हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने ही इकलौता विकल्प बीजेपी उम्मीदवार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकल रोहतगी ने…

सौजन्य से:- ABP News
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव : निर्वाचन प्रक्रिया में दखल से सुप्रीम कोर्ट ने मना किया, मीनाक्षी नटराजन के पास हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने ही इकलौता विकल्प
बीजेपी उम्मीदवार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकल रोहतगी ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि उसके लिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आया जा सकता है.
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. मीनाक्षी ने अपना नामांकन खारिज करने के निर्वाचन अधिकारी के फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल से मना कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानूनन इस मामले में हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करना ही इकलौता विकल्प है. वह चाहें तो इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 329 की व्याख्या करते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायपालिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करती. कानून में यही व्यवस्था है कि प्रक्रिया से असंतुष्ट उम्मीदवार चुनाव के बाद हाई कोर्ट जा सकता है. जजों ने कहा है कि वह किसी एक उम्मीदवार के लिए स्थापित संवैधानिक व्यवस्था को नहीं बदल सकते. इस तरह का मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं सुना जा सकता.
इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने से मना कर दिया था. मीनाक्षी का नामांकन खारिज होने के बाद मैदान में बीजेपी के 3 उम्मीदवार थे. शाम में निर्वाचन अधिकारी ने तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया था.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी के तीसरे प्रत्याशी महेश केवट ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि मीनाक्षी ने तेलंगाना में अपने खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले की जानकारी अपने शपथ पत्र में नहीं दी है. इस आपत्ति की जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी का नामांकन रद्द किया था.
इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मीनाक्षी नटराजन के लिए पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि तेलंगाना में चल रहा मामला एक निजी शिकायत है. मामले में कोर्ट ने मीनाक्षी से जवाब मांगा है. अगर केस में आरोप तय हो जाते या औपचारिक रूप से संज्ञान लिया जाता तो मीनाक्षी इसे नामांकन पत्र में जरूर लिखतीं. इसमें छुपाने जैसी कोई बात नहीं थी.
बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट के लिए पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने याचिका का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33A में आपराधिक मामलों की जानकारी को लेकर जो व्यवस्था दी गई है, निर्वाचन अधिकारी ने सिर्फ उसका पालन किया है.
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रोहतगी ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि उसके लिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आया जा सकता है. अनुच्छेद 329 में चुनाव हो जाने के बाद हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने की व्यवस्था दी गई है.
याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील सिंघवी ने 1978 के मोहिंदर सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मामले में दखल देने पर रोक नहीं है. इस पर चुनाव आयोग के वकील ने 1952 के पोन्नुसामी फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के बीच में सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं दे सकता
आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया. बेंच की तरफ से आदेश लिखवाते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'याचिकाकर्ता के पास हाई कोर्ट जाने का विकल्प है. अगर वह हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करती हैं, तो हमारी तरफ से की गई किसी टिप्पणी का उस याचिका पर असर नहीं पड़ेगा.'
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