होमवकीलस्थायी लोक अदालत: अधिकारियों को जागरूक करने का अभियान
वकील

स्थायी लोक अदालत: अधिकारियों को जागरूक करने का अभियान

बागेश्वर। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने अधिकारियों को स्थायी लोक अदालत के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। प्रशिक्षण के दौरान कानूनी सहायता, सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान और निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई।

8 अगस्त 2026 को 11:15 am बजे
स्थायी लोक अदालत: अधिकारियों को जागरूक करने का अभियान

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Uttarakhand

- Bageshwar

- Bageshwar Legal Aid Training | Lok Adalat Awareness Program

स्थायी लोक अदालत पर अधिकार मित्रों को प्रशिक्षण:सार्वजनिक सेवाओं के विवादों के समाधान और निःशुल्क कानूनी सहायता पर जागरूक किया

- कॉपी लिंक

बागेश्वर। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पंकज तोमर के मार्गदर्शन में गुरुवार को बागेश्वर के ब्लॉक सभागार में स्थायी लोक अदालत विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक

प्रशिक्षण के दौरान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता कुमारी ने अधिकार मित्रों को बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत गठित स्थायी लोक अदालत मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन, डाक एवं टेलीफोन, बिजली, पानी, सफाई, अस्पताल एवं चिकित्सा सेवाओं, बीमा और बैंकिंग जैसी सेवाओं से संबंधित विवादों में स्थायी लोक अदालत की सहायता ली जा सकती है।

सचिव ने यह भी बताया कि स्थायी लोक अदालत की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यहां मामला दर्ज कराने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। इसके अतिरिक्त, व्यक्ति बिना किसी वकील के भी स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

उन्होंने जानकारी दी कि स्थायी लोक अदालत में सर्वप्रथम दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाता है। यदि समझौता नहीं हो पाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय दिया जा सकता है। स्थायी लोक अदालत का निर्णय पक्षकारों के लिए बाध्यकारी होता है और इसे सिविल कोर्ट की डिक्री के समान ही मान्यता प्राप्त है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में निःशुल्क कानूनी सहायता, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987, पैरालीगल वालंटियर्स (पीएलवी) की भूमिका, विधिक सेवाओं के कार्य तथा अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत निःशुल्क विधिक सहायता के पात्र व्यक्तियों के संबंध में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।

सचिव अनीता कुमारी ने अधिकार मित्रों से अपील की कि वे स्थायी लोक अदालत और निःशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। इसका उद्देश्य यह है कि जरूरतमंद लोग अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की नई अपील, आंखों का इलाज विदेश जाने की मांग
वकील

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की नई अपील, आंखों का इलाज विदेश जाने की मांग

अदालत ने FDA को फटकार लगाई: अमेज़ॅन मामले में 'तलवार से मच्छर मारने' का आरोप
वकील

अदालत ने FDA को फटकार लगाई: अमेज़ॅन मामले में 'तलवार से मच्छर मारने' का आरोप

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश: अखिल भारतीय बार परीक्षा परिणाम के चार सप्ताह में नामांकन संख्या जारी हो
वकील

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश: अखिल भारतीय बार परीक्षा परिणाम के चार सप्ताह में नामांकन संख्या जारी हो

कानूनी ज्ञान में बढ़ाई: लाइवलॉ और क्यूशाला का साप्ताहिक क्विज़ शुरू हो गया
वकील

कानूनी ज्ञान में बढ़ाई: लाइवलॉ और क्यूशाला का साप्ताहिक क्विज़ शुरू हो गया

वक्फ मामला: कोर्ट फीस के बिना मुकदमे खारिज करने से चुनिंदा लोग क्यों फायदेमंद हैं?
वकील

वक्फ मामला: कोर्ट फीस के बिना मुकदमे खारिज करने से चुनिंदा लोग क्यों फायदेमंद हैं?

सुप्रीम कोर्ट में JPSC मामला पहुंचा, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
वकील

सुप्रीम कोर्ट में JPSC मामला पहुंचा, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग

कानूनी रूप से जिज्ञासु लोगों के लिए लाइवलॉ और क्यूशाला की चुनौती
वकील

कानूनी रूप से जिज्ञासु लोगों के लिए लाइवलॉ और क्यूशाला की चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने डीपीडीपी अधिनियम और आरटीआई संशोधन पर केंद्र से जवाब मांगा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने डीपीडीपी अधिनियम और आरटीआई संशोधन पर केंद्र से जवाब मांगा

ताज़ा ख़बरें