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सिर्फ ग्लोबल पॉलिसी से नहीं, भारतीय कानून से मेटा को भी कैसा पालन?

भारत में मेटा के प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए कंपनी को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा, सरकार ने मेटा को चेतावनी दी है।

9 अगस्त 2026 को 08:15 am बजे
सिर्फ ग्लोबल पॉलिसी से नहीं, भारतीय कानून से मेटा को भी कैसा पालन?

सौजन्य से:- Jagran

'सिर्फ ग्लोबल पॉलिसी ही नहीं, भारतीय कानून का भी करना होगा पालन', केंद्र सरकार ने दी मेटा को वॉर्निंग

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ कई बैठकों के बाद सरकार ने कहा है कि मेटा को केवल अपनी वैश्विक नीतियों के बजाय भारतीय कानू ...और पढ़ें

HighLights

- मेटा को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा, वैश्विक नीति नहीं।

- सरकार ने सामग्री मॉडरेशन, डीपफेक पर ठोस बदलाव मांगे।

- CSAM पर शून्य सहिष्णुता, मानवीय समीक्षा तंत्र आवश्यक।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बीच कई बैठकों के बाद सरकारी सूत्रों ने रविवार को कहा कि मेटा के प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा और वे सिर्फ कंपनी की ग्लोबल पॉलिसी से नहीं चल सकते।

अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा कि सरकार ने मेटा को अपने एल्गोरिदम में पूरी तरह से बदलाव करने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि मेटा की कंटेंट पॉलिसी, प्लेटफॉर्म गाइडलाइंस और मॉडरेशन सिस्टम भारतीय कानूनों के अनुरूप हों।

'मेटा को करना होगा ठोस बदलाव'

हालांकि चिंताएं बनी हुई हैं क्योंकि अधिकारियों ने कहा कि इन चर्चाओं का मकसद सिर्फ आश्वासन पाना नहीं, बल्कि कंपनी से ठोस बदलाव करवाना है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि देश के बाहर काम करने वाली टीमें भारत के सांस्कृतिक माहौल को हमेशा पूरी तरह से नहीं समझ पाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में कंटेंट मॉडरेशन को बेहतर बनाने के लिए मेटा को ज्यादा लोकल इनपुट की जरूरत है, जिसमें भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक बारीकियों की बेहतर समझ शामिल है।

यह ताजा स्पष्टीकरण शुक्रवार को मेटा की टेक्निकल टीम और मंत्रालय (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद आया है। इस बैठक में कंपनी ने ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट को संभालने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम के बारे में बताया।

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अभी होनी है एक और दौर की बैठक

सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच टेक्निकल बातचीत जारी है और अगले हफ्ते एक और दौर की बैठक होने की उम्मीद है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) के मामले में सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि सरकार का रुख जीरो टॉलरेंस और जीरो कॉम्प्रोमाइज वाला है।

अधिकारियों ने कहा कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर इस तरह के कंटेंट को बने रहने देना नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी को ज्यादा मजबूत और सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है और सिर्फ भरोसे दिलाने के बजाय ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।

सरकार ने मेटा से क्या कहा?

कंपनी के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच मेटा की ग्लोबल टीम और सरकारी अधिकारियों के बीच पहले हुई बैठकों में भी यह मुद्दा उठाया गया था। सरकार ने मशहूर हस्तियों से जुड़े डीपफेक को लेकर भी चिंता जताई है।

एएनआई के सूत्रों ने कहा कि अधिकृत या वेरिफाइड हैंडल से पोस्ट किए गए कंटेंट को गलत तरीके से डीपफेक के तौर पर नहीं पहचाना जाना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को पूरी तरह से ऑटोमेटेड डिटेक्शन सिस्टम पर नहीं छोड़ा जा सकता और उन्होंने ह्यूमन-इन-द-लूप मैकेनिज्म की मांग की ताकि यह पक्का किया जा सके कि किसी भी कंटेंट को हटाने से पहले उसकी ठीक से समीक्षा की जाए।

मेटा से किए गए ये सवाल

सरकार ने मेटा से सिंथेटिक रूप से बनाए गए उस कंटेंट के बारे में भी सवाल किया है जो डीपफेक के तौर पर पहचाने और हटाए जाने के बाद फिर से सामने आ जाता है। अधिकारियों ने मेटा से उन ठोस कदमों के बारे में जानकारी मांगी है जो वह ऐसे कंटेंट को हटाए जाने के बाद दोबारा सामने आने से रोकने के लिए उठा रही है।

बातचीत के दौरान मेटा के रिकमेंडेशन और वायरल होने वाले एल्गोरिदम की भी जांच-पड़ताल की गई है। सरकार ने सवाल किया कि यूजर्स को अक्सर उनकी बताई गई रुचियों से अलग कंटेंट क्यों दिखाया जाता है और क्या यह मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम में कमियों की ओर इशारा करता है।

अधिकारियों ने यह भी पूछा कि सिंथेटिक रूप से बनाए गए कंटेंट को कंपनी के एल्गोरिदम के जरिए बढ़ावा क्यों दिया जाता रहता है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने जोर दिया है कि एक बार जब ऐसा कंटेंट फ्लैग हो जाए तो उसे आगे रिकमेंड नहीं किया जाना चाहिए या वह प्लेटफॉर्म पर बार-बार नहीं दिखना चाहिए।

मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम का मुद्दा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों के साथ पिछली बैठकों में भी उठा था, जब कंपनी की ग्लोबल टीम से उसके एल्गोरिदम और भारतीय कानूनों के पालन के बारे में सवाल पूछे गए थे।

पिछली बैठक में क्या हुआ?

पिछली रिपोर्टों के अनुसार, मेटा की टेक्निकल टीम ने सरकार की चिंताओं को दूर करने के लिए अपने प्रस्तावित उपायों के बारे में बताया था और कहा था कि उनके पास डीपफेक, CSAM और बॉट अकाउंट्स से निपटने के लिए समाधान मौजूद हैं।

सरकार भारतीय कानून के तहत इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) प्रावधानों के पालन के मामले में भी मेटा की जांच कर रही है, जिसमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 79 के तहत सेफ-हार्बर सुरक्षा से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने पहले डीपफेक कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और इस बात की जांच कर रही थी कि यूजर्स कौन सा कंटेंट देखते हैं, यह तय करने में मेटा की भूमिका का एक इंटरमीडियरी के तौर पर उसकी स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है।

हालांकि, ताजा बातचीत मेटा के सिस्टम के टेक्निकल कामकाज और भारत में उसकी ग्लोबल पॉलिसीज को कैसे लागू किया जाता है इस पर केंद्रित रही है। जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही है सरकारी सूत्रों का कहना है कि मकसद मेटा के एल्गोरिदम में पूरी तरह बदलाव की मांग करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसके प्लेटफॉर्म, कंटेंट पॉलिसीज और मॉडरेशन सिस्टम भारतीय कानून का पालन करें और भारत के भाषाई और सांस्कृतिक संदर्भ का भी ठीक से ध्यान रखें।

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