कानून मंत्री मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों पर सुझाव मांगे, आईटीएटी को न्यायिक आधारशिला बताया
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों का मसौदा तैयार करने हेतु हितधारकों से सुझाव माँगे और इस पहल को सरकार के सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण अभियान का हिस्सा बताया। उन्होंने कोलकाता में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के नए परिसर के उद्घाटन पर कहा कि आईटीएटी को ‘सभी न्यायाधिकरणों की जननी’ कहा जाए, क्योंकि इस संस्था ने करदाताओं को निष्पक्ष, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराया है। राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के अंतर्गत 16 न्यायाधिकरणों में सुधार की योजना है, जो 12 राज्यों तथा पूर्वोत्तर के सात राज्यों में कर संबंधी अपीलों के निपटारे को और सुगम बनाएगी।

सौजन्य से:- Jagran
कानून मंत्री मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों पर मांगे सुझाव, आईटीएटी को बताया 'सभी न्यायाधिकरणों की जननी'
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। उ
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।
उन्होंने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) को देश के न्यायाधिकरण तंत्र की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए ‘सभी न्यायाधिकरणों की जननी’ के रूप में इसकी भूमिका रेखांकित की।
यह बात उन्होंने सात सितंबर को कोलकाता में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के नए परिसर के उद्घाटन के अवसर पर कही।
16 न्यायाधिकरणों में सुधार से शुरू होगा बड़ा अभियान
कानून मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग से जुड़े सुधारों में 16 न्यायाधिकरणों को शामिल किया गया है। यह पहल सरकार के व्यापक ‘सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण’ अभियान की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के सुझाव महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने आइटीएटी के आदर्श वाक्य ‘निष्पक्ष, सुलभ, त्वरित न्याय’ का उल्लेखकरते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष, सुलभ और शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आइटीएटी ने अपने फैसलों के माध्यम से करदाताओं के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है।
12 राज्यों के करदाताओं को मिलेगा नए परिसर का लाभ
कोलकाता स्थित आइटीएटी का नया परिसर 12 राज्यों में न्यायिक सेवा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इनमें पूर्वोत्तर के सात राज्य भी शामिल हैं। नए परिसर से क्षेत्र में कर संबंधी अपीलों के निपटारे और न्याय तक पहुंच को और सुगम बनाने की उम्मीद है।
मेघवाल ने आइटीएटी के न्यायिक इतिहास में योगदान देने वाले कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने राजस्थान के अनेक दिग्गजों के आइटीएटी की यात्रा में योगदान की भी चर्चा की।
उन्होंने सदस्य मोक्ष महाजन द्वारा ‘पूंजीगत प्रोत्साहन’ और ‘आय’ के बीच किए गए अंतर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय का उदाहरण देते हुए कहा कि आइटीएटी की न्यायिक व्याख्याओं का लाभ हजारों करदाताओं को मिला है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सर्वर त्रुटि 500: अनुरोध पूरा नहीं हो सका

करनाल में प्री‑लोक अदालत: बैंक से जुड़े 500 विवादों का समाधान

सर्वर त्रुटि 500: अनुरोध में समस्या

सर्वर त्रुटि 500: क्या करें?

सर्वर त्रुटि: 500 – अस्थायी समस्या

सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास आवश्यक

सर्वर त्रुटि 500 – कृपया पुनः प्रयास करें

कुल्लू में कल राष्ट्रीय लोक अदालत, हल होंगे जमीनी और आर्थिक विवाद
ताज़ा ख़बरें
- हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की सजा‑पुनरावलोकन में देरी को माफ़ करने का आदेश दिया
- मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय लोक अदालत में 25 काउंटर, चालान निपटारे के लिए नकद भुगतान पर ज़ोर
- मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत हेतु बैंक अधिकारियों को निर्देश
- दिल्ली हाई कोर्ट ने मातृत्व‑आधारित छूट को नकारते हुए विनेश फोगाट को 2026 विश्व चैंपियनशिप ट्रायल से बाहर किया
- डिजिटल ज़मीन म्यूटेशन अनिवार्य नहीं, पर ऑनलाइन आवेदन को बढ़ावा – झारखंड हाई कोर्ट का फैसला
- लोक अदालत के लिए जागरूकता शिविर: ग्रामीणों को तेज़ निपटारे का अवसर
- सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें
- सुप्रीम कोर्ट की चार‑सप्ताह की सीमा समाप्त, जेएसएससी नियुक्ति में केवल एक सप्ताह बचा

