सुप्रीम कोर्ट में CJI को भद्दे शब्द, अब जस्टिस सूर्यकांत ने ही दिया जवाब, देखें क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई को हैरान कर देने वाले अपशब्द कहने के मामले पर अब जस्टिस सूर्यकांत चुप्पी तोड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना को नजरअंदाज किया जाना चाहिए क्योंकि युवा कभी-कभी ऐसी हरकतें कर देते हैं।

सौजन्य से:- ABP News
सुप्रीम कोर्ट में CJI को कहे अपशब्द, अब जस्टिस सूर्यकांत ने खुद दिया जवाब, जानें क्या बोले
सुप्रीम कोर्ट में बीते दिनों देश के मुख्य न्यायाधीश को अपशब्द कहे जाने के मामले पर खुद CJI का बयान आया है. उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम सभी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और छवि को बनाए रखें.
सुप्रीम कोर्ट में बीते दिनों देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अपशब्द कहने और कोर्ट को आदेश देने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था, जिस पर अब सीजेआई सूर्यकांत ने चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि इस घटना को नजरअंदाज कर देना चाहिए क्योंकि ऐसी चीजें कभी-कभी हो जाती हैं.
जस्टिस सूर्यकांत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "इस घटना को नजरअंदाज करें. युवा कभी-कभी ऐसी हरकतें कर देते हैं." उन्होंने आगे कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने कहा, "मैं यह कहना चाहूंगा कि हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम सभी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और छवि को बनाए रखें. हमारा यह भी कर्तव्य है कि हम उनकी रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि उनका सम्मान बना रहे."
बता दें कि 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में काफी हंगामा हुआ था, जब अपनी पैरवी कर रहे इलाहाबाद के एक वकील ने CJI का नाम लेकर अपशब्द कहे और कोर्ट रूम में कागज भी फेंके. इसके बाद कार्यवाही में बाधा डालने को लेकर सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर निकाल दिया. प्रबल प्रताप नाम के याचिकाकर्ता ने पीठ के समक्ष उपस्थित होकर खुद को सर्वोच्च शासक बताया.
क्या है पूरा मामला
प्रबल प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को न्यायिक सेवक कहकर संबोधित करते हुए कहा, "श्रीमान न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध गिरोह चलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करें." ये सुनकर हैरान हुए जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा, "आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?" इसके बाद याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश को अपशब्द कहना शुरू कर दिया और कागज हवा में उछाल दिए.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
इस व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना या कोई अन्य दंडात्मक कार्यवाही नहीं की. अदालत ने कहा, "वह बहुत परेशान है. यह सब उनकी हताशा है. हमें उनके प्रति सहानुभूति है." सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की. एक बयान में कहा, "अदालत की गरिमा का हर समय सम्मान किया जाना चाहिए. न्यायिक कार्यवाही में दुर्व्यवहार, धमकी या बाधा डालने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से अस्वीकार्य है और यह न्याय व्यवस्था पर प्रहार है."
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