महाराष्ट्र में अवैध मतांतरण पर अब कठोर प्रतिबंध, 7 साल तक की जेल की संभावना
महाराष्ट्र में अवैध मतांतरण के खिलाफ कानून लागू हो गया है, जिसमें जबरन, धोखाधड़ी, प्रलोभन या शादी के जरिये होने वाले अवैध मतांतरण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। दोषी पाए जाने पर पहली बार अपराध करने वालों को 7 साल तक की जेल की संभावना है।

सौजन्य से:- Jagran
महाराष्ट्र में अवैध मतांतरण रोकने वाला कानून लागू, दोषी पाए जाने पर सात साल की जेल
महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी या प्रलोभन से होने वाले अवैध मतांतरण के खिलाफ कानून लागू हो गया है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 30 जुलाई को अधिसूचि ...और पढ़ें
HighLights
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद महाराष्ट्र में धर्मांतरण-रोधी कानून लागू।
- जबरन मतांतरण पर पहली बार में सात साल तक की जेल।
- मतांतरण से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना अनिवार्य।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी, प्रलोभन या शादी के जरिये होने वाले अवैध मतांतरण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिलने और सरकारी गजट में प्रकाशित होने के बाद महाराष्ट्र का धर्मांतरण-रोधी कानून लागू हो गया है।
मार्च में बजट सत्र के दौरान राज्य विधानसभा के दोनों सदनों से पारित 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 30 जुलाई को राज्य के राजपत्र (गजट) में अधिसूचित किया गया।
इस नए कानून के साथ, महाराष्ट्र अवैध मतांतरण विरोधी कानून बनाने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में अवैध मतांतरण रोकने का कानून है।
नए कानून के तहत मतांतरण करने वाले को मतांतरण से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा। मतांतरण के बाद की तय प्रक्रियाओं का भी पालन करना होगा। जबरन, दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलत जानकारी या शादी के नाम पर धोखे से किए गए मतांतरण को दंडनीय अपराध है।
पहली बार अपराध करने वाले को सात साल तक की जेल हो सकती है। बार-बार अपराध करने पर सज़ा 10 साल तक बढ़ सकती है। इस कानून के तहत पीड़ित के माता-पिता, भाई-बहनों और अन्य करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
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