सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट‑जू क्रॉसिंग पर स्पीड ब्रेकर व रंबल स्ट्रिप की माँग की, जीवन सुरक्षा को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा हेतु केंद्र से स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप स्थापित करने का आदेश दिया, इसे लोगों की जिंदगी का सवाल कहा। कोर्ट ने बताया कि केवल ट्रैफिक सिग्नल पर्याप्त नहीं है और ट्रैफ़िक प्रवाह का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की सिफ़ारिश की। उसी दिन चिड़ियाघर में एक बंदर बाड़े से बाहर निकल कर कर्मचारी व दर्शक पर हमला कर गया, जिससे चोटें आईं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्र से स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने पर फैसला लेने को कहा। कोर्ट ने कहा कि यह लोगों की जिंदगी का सवाल है। इसी दिन चिड़ियाघर में बंदर ने कर्मचारी और दर्शक पर हमला किया।
नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल जूलॉजिकल गार्डन (राष्ट्रीय प्राणी उद्यान) के पास व्यस्त सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने पर निर्णय लेने को कहा। कोर्ट ने कहा कि यह लोगों की जिंदगी का सवाल है और सड़क सुरक्षा के उपाय पर्याप्त होने चाहिए।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एस. राजशेखरन बनाम केंद्र सरकार मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। कोर्ट ने पिछले साल भी इस क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर चिंता जताई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने अब इस स्थान पर ट्रैफिक सिग्नल लगा दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वहां अब भी पैदल यात्रियों के लिए उचित क्रॉसिंग नहीं है।
सिर्फ सिग्नल नहीं, स्पीड कंट्रोल भी जरूरी
कोर्ट सलाहकार अग्रवाल ने कहा कि सिर्फ ट्रैफिक सिग्नल लगाना पर्याप्त नहीं है। वहां स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाए जाएं ताकि गाड़ियों की स्पीड नियंत्रित हो और पैदल यात्रियों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने में मदद मिले। उन्होंने सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही और पैदल यात्रियों के आवागमन का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को गाड़ियों और पैदल वालों के फ्लो की स्टडी कर आवश्यक उपाय सुझाने चाहिए।
यह लोगों की जिंदगी का सवाल, बेहतर समाधान चाहिए: जस्टिस पारदीवाला
अडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रम बनर्जी ने कहा कि सरकार की ओर से ट्रैफिक सिग्नल लगाया गया है और यह पर्याप्त है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट किसी अन्य उपाय को जरूरी मानता है तो केंद्र उसे लागू करेगा। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, 'यह लोगों की जिंदगी का सवाल है। हम दोनों खुद वहां जाएंगे। आप भी हमारे साथ चलिए। सभी वहां जाएंगे। यह जनहित का मामला है।' जब एएसजी ने कहा कि सरकार ने बेहतर समाधान तलाशने की कोशिश की है, तो जस्टिस पारदीवाला ने कहा- 'समाधान बहुत, बहुत बेहतर होने चाहिए।'
बंदर ने कर्मचारी और दर्शक पर किया हमला
दिल्ली चिड़ियाघर में मंगलवार को बोनेट मकाक बंदर बाड़े से निकलकर गैलरी में पहुंच गया और एक कर्मचारी व दर्शक पर हमला कर दिया। हमले में कर्मचारी की एक उंगली कट गई और दोनों पैरों में गहरे घाव हुए, जबकि दर्शक की जांघ पर काटने से चोट आई। बताया गया कि रविवार रात बाड़े का गेट ठीक से बंद नहीं हुआ था। दिसंबर 2025 में भी इसी बंदर ने एक कर्मचारी पर हमला किया था।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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