हिमाचल हाईकोर्ट ने चार्जफ़्रेम के बाद भी पीड़ित की याचिका पर आगे की जांच का आदेश दिया
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस जांच में गंभीर चूके हों तो चार्जशीट दाखिल या चार्जफ़्रेम हो जाने के बाद भी पीड़ित पक्ष की अर्जी पर न्यायालय अतिरिक्त जांच का निर्देश दे सकता है। यह फैसला पांवटा साहिब के एक मामले में आया, जहाँ पुलिस ने हत्या के वीडियो के बावजूद फॉरेंसिक जांच और मुख्य गवाह के बयान को नजरअंदाज़ किया था।

सौजन्य से:- ETV Bharat
चार्ज फ्रेम होने के बाद भी पीड़ित पक्ष की मांग पर फिर से हो सकती है जांच, हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
चार्जशीट दाखिल होने या चार्जिज फ्रेम होने के बाद भी पीड़ित पक्ष की अर्जी पर अदालत आगे की जांच के आदेश दे सकती है.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 16, 2026 at 7:28 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने क्रिमिनल केसिज में निष्पक्ष जांच को लेकर एक अहम कानूनी फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस जांच में कोई गंभीर कमी या खामी रह जाती है, तो चार्जशीट दाखिल होने या चार्जिज फ्रेम होने के बाद भी शिकायतकर्ता यानी पीड़ित पक्ष की अर्जी पर अदालत आगे की जांच के आदेश दे सकती है.
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने एक मामले की सुनवाई करते हुए पांवटा साहिब के अतिरिक्त सत्र अदालत के पुराने आदेश को रद्द कर दिया. लोअर कोर्ट ने शिकायतकर्ता की आगे की जांच वाली याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि ऐसी मांग सिर्फ जांच एजेंसी ही कर सकती है, शिकायतकर्ता नहीं. मामले के अनुसार मृतक अशरफ अली के भाई अर्शीद अली की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप में नवंबर 2025 में एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस ने जांच पूरी कर सक्षम अदालत में गैर-इरादतन हत्या के तहत चार्जशीट दाखिल की. इस पर सक्षम अदालत ने संज्ञान लिया. यह मामला आगे की सुनवाई और ट्रायल के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पांवटा साहिब की अदालत में भेजा गया.
शिकायतकर्ता ने पुलिस जांच में गंभीर कमियां बताते हुए कोर्ट में आगे की जांच कराने के लिए आवेदन किया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पांवटा साहिब ने शिकायतकर्ता की इस अर्जी को खारिज कर दिया. इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया. यह मामला अशरफ अली की कथित हत्या से जुड़ा है. उसे कथित तौर पर गाड़ी से कुचलकर मार डाला गया था. शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना का पूरा वीडियो आरोपियों ने खुद अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया था और उसे सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था, जिसमें एक आरोपी दूसरे को कुचल दे कहते हुए सुनाई दे रहा है. पुलिस ने इस मामले में हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या की चार्जशीट लगाई. सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि पुलिस ने घटना का वीडियो होने के बावजूद आरोपियों के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा ही नहीं और मुख्य चश्मदीद गवाह शेर खान का बयान भी दर्ज नहीं किया. हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता भी जांच के इस चरण में अर्जी दे सकता है.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
नरवल पुलिस ने पॉक्सो केस में टिंकू को वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया

दिल्ली के दूसरे मामले के कारण जार्डन ब्राउन की महराजगंज सुनवाई टली, अगली तिथि 28 सितंबर निर्धारित

सुप्रीम कोर्ट ने 200‑से अधिक दिनों के विलंब पर तेलंगाना की लोधकुंटा भूमि याचिका को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, काशी मठ के स्वामित्व विवाद में कार्यवाही जारी

सुप्रीम कोर्ट के मेल‑इन बैलेट फैसले पर ट्रंप का प्रचंड गुस्सा, जजों को डेमोक्रेट्स से डरते कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने पंतजलि मामले में ITAT के सात आदेश रद्द किए, प्रक्रिया में लापरवाही पर तीखा प्रहार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को डिमांड पर पेंशन चुनौतियों पर रोक लगाई, 270 अपीलें खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से ट्रैफिक उल्लंघन मामलों के पुनर्स्थापन पर स्पष्टीकरण माँगा
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक बलजीत यादव की जमानत याचिका खारिज की
- सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की लोथकुंटा भूमि पर दावों को खारिज किया
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के मेल‑इन वोटिंग पर रोक को खारिज किया, ट्रम्प ने न्यायालय पर सख्त आरोप लगाए
- हाईकोर्ट ने फतेहपुर में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी, 16 सितंबर को हाज़िरी अनिवार्य
- अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने नकली साइबर कॉल सेंटर केस में 119 की गिरफ्तारी को कायम रखा
- सुप्रीम कोर्ट ने फरहाद सूरी की यूपी पुलिस पर सीबीआई जांच की मांग खारिज की
- सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 5 करोड़ जमा करने के लिए दो सप्ताह की अतिरिक्त अवधि दी
- उपचुनाव से पहले रीतब्रत गुट पर दलबदल अधिनियम के तहत नोटिस, विधायक पद रद्दीकरण की संभावना

