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अंतरिम जमानत पर शर्तों के साथ स्वतंत्र भारद्वाज को जेल से रिहा, उल्लंघन पर दोबारा कैद का जोखिम

दिल्ली की अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ्तों की अंतरिम जमानत दी, पर उन्होंने सोशल मीडिया पर केस से संबंधित कोई पोस्ट न करने और पीड़ित व उसके परिवार से संपर्क न करने जैसी सख़्त शर्तें लगाई हैं। यदि इन शर्तों का कोई उल्लंघन हुआ तो जमानत तुरंत रद्द कर दोबारा जेल भेजा जा सकता है, जिसकी निगरानी जांच अधिकारी करेंगे और अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश की जाएगी।

16 सितंबर 2026 को 05:05 am बजे
अंतरिम जमानत पर शर्तों के साथ स्वतंत्र भारद्वाज को जेल से रिहा, उल्लंघन पर दोबारा कैद का जोखिम

सौजन्य से:- Hindustan

स्वतंत्र भारद्वाज को दोबारा जेल भेजा जा सकता है; अदालत ने खुला रखा है रास्ता

दिल्ली की एक अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को मंगलवार को अंतरिम जमानत भले ही दे दी, लेकिन उस पर शर्तों का सख्त पहरा भी लगा दिया है। अदालत ने कहा है यदि उसने किसी शर्त का उल्लंघन किया तो बीच में ही राहत छिन सकती है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर एक दलित शख्स के साथ मारपीट करने की वजह से एससी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यू्ट्यूबर और खुद को हिंदुवादी कार्यकर्ता कहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने तीन सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। नियमित जमानत याचिका पर विचार से पहले अदालत देख लेना चाहती है कि बाहर निकलने के बाद उसका आचरण कैसा रहता है। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ जमानत देते हुए जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता को अधिकार दिया है कि यदि वह किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो तुरंत इसकी सूचना दी जाए ताकि उसको मिली राहत की समीक्षा का जा सके या दोबारा जेल भेजा जा सके।

मंगलवार को बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की कोर्ट ने कहा कि भारद्वाज दस दिन से कुछ अधिक समय से हिरासत में हैं और यह अवधि उन्हें अपने आचरण पर विचार करने के लिए पर्याप्त थी। बुधवार को आए फैसले में अदालत ने भारद्वाज को 50 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर अंतरिम जमानत दी। राहत देते हुए अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाईं हैं।

अदालत ने क्या लगाईं शर्तें

अदालत ने कहा है कि स्वतंत्र भारद्वाज जमानत अवधि के दौरान सोशल मीडिया पर इस केस के संबंध में कुछ पोस्ट नहीं कर सकता है। इसके अलावा वह पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य से संपर्क करने का प्रयास नहीं करेगा। अदालत ने कहा है कि अंतरिम जमानत के दौरान आवदेक के व्यवहार (जिसमें सोशल मीडिया की गतिविधियां भी शामिल हैं) पर जांच अधिकारी नजर रखेंगे और अगली सुनवाई की तारीख पर इसको लेकर एक रिपोर्ट पेश किया जाएगा।

जज ने कहा, 'इस अवधि के दौरान उसके आचरण पर नजर रखी जाएगी और उसके बाद नियमित जमानत के अनुरोध पर उसके आचरण को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा। 23 जून 2026 की घटना के संबंध में जो भी फैसला होना है, वह अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा न कि सार्वजनिक रूप से या सोशल मीडिया पर आई सामग्री के आधार पर।'

शर्तें टूटे तो ना करें इंतजार, तुरंत बताएं: अदालत

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी को यह छूट है कि वे जमानत की शर्तों के किसी भी उल्लंघन की जानकारी तुरंत अदालत को दें, और इसके लिए अगली तारीख का इंतजार न करें, ताकि अंतरिम जमानत की समीक्षा की जा सके या उसे रद्द किया जा सके। अदालत ने कहा, 'नियमित जमानत की अर्जी लंबित रहेगी और अगली तारीख पर आवेदक के आचरण और रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार किया जाएगा।'

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