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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रस्ताव: पेट्रोल-डीजल देने से पहले इंश्योरेंस की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध मोटर इंश्योरेंस चलने वाले वाहनों पर सख्ती के लिए पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन का इंश्योरेंस जांचने की व्यवस्था हो सकती है. अगर इंश्योरेंस नहीं हुआ तो पेट्रोल या डीजल देने से इनकार किया जा सकता है.

5 अगस्त 2026 को 07:15 am बजे
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रस्ताव: पेट्रोल-डीजल देने से पहले इंश्योरेंस की जांच

सौजन्य से:- Money9live

इंश्योरेंस नहीं तो पेट्रोल-डीजल नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रस्ताव; पेट्रोल पंप पर होगी इंश्योरेंस की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध मोटर इंश्योरेंस चलने वाले वाहनों पर सख्ती के लिए पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन का इंश्योरेंस जांचने की व्यवस्था हो सकती है. इंश्योरेंस नहीं होने पर पेट्रोल या डीजल देने से इनकार किया जा सकता है.

Highlights

- सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने से पहले बीमा जांच का पायलट प्रोजेक्ट सुझाया है.

- एएनपीआर कैमरों को वाहन और बीमा डेटाबेस से जोड़कर बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान और ई चालान की व्यवस्था पर भी विचार है.

- नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा 3 से 4 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 से 6 साल करने का प्रस्ताव है.

Motor Insurance: सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध व्हीकल इंश्योरेंस सड़कों पर चलने वाले वाहनों पर सख्ती की दिशा में बड़ा प्रस्ताव रखा है. कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय से पेट्रोल पंपों पर इंश्योरेंस जांच के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है. प्रस्ताव के तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल देने से रोका जा सकता है. हालांकि अभी यह पूरे देश में लागू नियम नहीं है. इसके अलावा कोर्ट ने इंश्योरेंस जांच के लिए तकनीक के इस्तेमाल और नए वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है.

पेट्रोल पंप पर पहले होगी इंश्योरेंस की जांच

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंपों पर वाहन का इंश्योरेंस जांचने की व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है. इसके तहत ईंधन देने से पहले यह देखा जा सकता है कि वाहन का इंश्योरेंस वैध है या नहीं. अगर इंश्योरेंस नहीं हुआ तो पेट्रोल या डीजल देने से इनकार किया जा सकता है. इसका मकसद अनिवार्य मोटर इंश्योरेंस नियमों का पालन बढ़ाना है. फिलहाल यह केवल प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट है और देशभर के पेट्रोल पंपों पर यह नियम लागू नहीं हुआ है.

कैमरे से पकड़े जाएंगे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन

कोर्ट ने सड़क और हाईवे पर लगे ANPR कैमरों को वाहन और इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा है. इससे कैमरे वाहन की पहचान के साथ उसके इंश्योरेंस की स्थिति भी जांच सकते हैं. इंश्योरेंस नहीं होने पर ऐसे वाहनों के खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकता है. ANPR कैमरों का इस्तेमाल पहले से तेज रफ्तार और दूसरे यातायात उल्लंघनों की पहचान में होता है. अब इनके जरिए बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर भी नजर रखी जा सकती है.

यह भी पढ़ें- ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए पेश किया अपना रोडमैप, खारिज किया ट्रंप का दावा; ओमान के साथ बातचीत जारी

मोबाइल से मौके पर इंश्योरेंस जांच

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को मोबाइल एप या हैंडहेल्ड डिवाइस देने का प्रस्ताव भी रखा है. इन इक्विपमेंट की मदद से पुलिस सड़क पर ही वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस जांच सकेगी. इसके लिए वाहन और इंश्योरेंस डेटाबेस से जानकारी जोड़ी जा सकती है. इससे पुलिस को इंश्योरेंस का फिजिकल डॉक्यूमेंट देखने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान मौके पर ही की जा सकेगी.

इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहनों के अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है. नए प्राइवेट कारों के लिए यह अवधि तीन साल से बढ़ाकर चार साल करने की बात कही गई है. वहीं नए दोपहिया वाहनों के लिए अवधि पांच साल से बढ़ाकर छह साल करने का प्रस्ताव है. इसका मकसद शुरुआती इंश्योरेंस अवधि खत्म होने के बाद वाहनों के बिना इंश्योरेंस चलने की समस्या को कम करना है. इससे इंश्योरेंस कवरेज लगातार बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

क्यों सख्ती की तैयारी कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट का फोकस अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर है. प्रस्तावित व्यवस्था में पेट्रोल पंप, सडक कैमरे और ट्रैफिक पुलिस तीन स्तर पर इंश्योरेंस की जांच हो सकती है. इससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान करना आसान हो सकता है. साथ ही ऐसे वाहनों पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को ज्यादा जानकारी मिल सकेगी. हालांकि इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले संबंधित विभाग पायलट प्रोजेक्ट और उसकी प्रक्रिया पर काम करेंगे.

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