सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों को हाई कोर्ट जाने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने 11 क्लब सदस्यों को दिल्ली हाई कोर्ट में नई याचिका दायर करने या मौजूदा बेदखली मामले में पक्षकार बनने का अधिकार प्रदान किया। वे क्लब की 27.3 एकड़ जमीन और इमारत को केंद्र सरकार द्वारा कब्जा करने और बेदखली की कार्रवाई से चुनौती देना चाहते हैं। बेंच ने कहा कि प्रबंधन में सरकारी नियंत्रण है और नई याचिका के गुण‑दोष पर हाई कोर्ट विचार करेगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य प्रबंधन संबंधी मुद्दा हाई कोर्ट के समक्ष उठाएं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 11 सदस्य हाई कोर्ट जा सकते हैं, जो नई याचिका पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा.
By Sumit Saxena
Published : September 15, 2026 at 7:14 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की इजाजत दे दी. ये सदस्य क्लब की 27.3 एकड़ जमीन और इमारत को केंद्र सरकार द्वारा अपने कब्जे में लेने और उसके बाद बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट जाना चाहते थे.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने आया. इन 11 सदस्यों की ओर से वकील विकास सिंह और वकील नितिन सलूजा पेश हुए. सुनवाई के दौरान सिंह ने कहा कि अभी क्लब का प्रबंधन केंद्र सरकार की बनाई एक कमेटी कर रही है और वह सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती. उन्होंने कहा, "यहां, पट्टा देने वाला (lessor) और पट्टा लेने वाला (lessee), दोनों ही सरकार के नियंत्रण में हैं."
सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त प्रबंधन ने चुनाव कराने और चुने हुए लोगों को नियंत्रण सौंपने के लिए एनसीएलएटी द्वारा तय समय-सीमा से ज्यादा समय ले लिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह क्लब पर कब्जा करने की एक गलत नीयत वाली कोशिश थी.
बेंच ने विपिन अग्रवाल और क्लब के 10 अन्य सदस्यों की याचिका का निपटारा कर दिया और उन्हें यह छूट दी कि वे या तो दिल्ली हाई कोर्ट में नई याचिका दायर करें या फिर बेदखली की कार्यवाही से जुड़े लंबित मामले में खुद को पक्षकार बनाएं.
बेंच ने कहा कि ये 11 सदस्य हाई कोर्ट जा सकते हैं जो नई याचिका पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा. 3 सितंबर को केंद्र सरकार ने एक अलग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ के परिसर से क्लब को बेदखल करने के संबंध में 16 सितंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगी.
अदालत क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. इन याचिकाओं में लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के एस्टेट ऑफिसर द्वारा क्लब के प्रबंधन को बेदखली के लिए जारी 29 जून के कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
अग्रवाल और अन्य लोगों ने सलूजा के माध्यम से दायर अपनी याचिका में लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस द्वारा 22 मई को जारी जमीन वापस लेने के अधिसूचना (resumption notification) और एस्टेट ऑफिसर द्वारा 29 जून को जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की थी.
ये भी पढ़ें: दिल्ली जिमखाना क्लब विरासत : शासन की बदलती प्राथमिकताओं पर बहस
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