सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द की: ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा कि जब देश पर हमला हो रहा हो, तो देश की आजादी को निजी आजादी से ज्यादा अहमियत देनी चाहिए. ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं है, जो अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत, दोनों पर असर डालती है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
'ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन केस में जमानत रद्द की - SUPREME COURT ON HEROIN CASE
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Published : June 4, 2026 at 6:19 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा है कि जब देश पर हमला हो रहा हो, तो देश की आजादी को निजी आजादी से ज्यादा अहमियत देनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं है, जो अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत, दोनों पर असर डालती है. जस्टिस संजय करोल और एन के सिंह की बेंच ने 2 जून को दिए अपने फैसले में कहा कि, "अगर देश की आजादी और निजी आजादी के बीच कोई टकराव होता है तो बेशक, आजादी ही अहमियत रखेगी. खासकर तब, जब देश के खिलाफ जंग छेड़ी जाती है, चाहे वह ड्रग्स की सप्लाई के रूप में हो, जो देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती है." बेंच ने कहा कि हालांकि इस कोर्ट ने कई मौकों पर माना है कि लंबे समय तक जेल में रहने पर संविधान के अनुच्छेद 21 के हिसाब से जमानत देना सही है, "हमने देखा है कि इसका इस्तेमाल एक जैसा नहीं है." बेंच ने कहा, "इसके अलावा, इसमें कोई शक नहीं है कि बेल के लिए लंबे समय तक जेल में रखना क्या होता है, यह इस कोर्ट या देश के कानून ने नहीं बताया है." बेंच ने कहा कि हालांकि न्यायिक समझ न्याय देने का एक जरूरी पहलू है, लेकिन यह कोर्ट इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि हिरासत में एक जैसी स्थिति वाले लोगों को अलग-अलग नतीजे मिल सकते हैं, जो संबंधित बेंच के अपनाए गए तरीके पर निर्भर करता है.
सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा है कि जब देश पर हमला हो रहा हो, तो देश की आजादी को निजी आजादी से ज्यादा अहमियत देनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं है, जो अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत, दोनों पर असर डालती है. जस्टिस संजय करोल और एन के सिंह की बेंच ने 2 जून को दिए अपने फैसले में कहा कि, "अगर देश की आजादी और निजी आजादी के बीच कोई टकराव होता है तो बेशक, आजादी ही अहमियत रखेगी. खासकर तब, जब देश के खिलाफ जंग छेड़ी जाती है, चाहे वह ड्रग्स की सप्लाई के रूप में हो, जो देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती है." बेंच ने कहा कि हालांकि इस कोर्ट ने कई मौकों पर माना है कि लंबे समय तक जेल में रहने पर संविधान के अनुच्छेद 21 के हिसाब से जमानत देना सही है, "हमने देखा है कि इसका इस्तेमाल एक जैसा नहीं है." बेंच ने कहा, "इसके अलावा, इसमें कोई शक नहीं है कि बेल के लिए लंबे समय तक जेल में रखना क्या होता है, यह इस कोर्ट या देश के कानून ने नहीं बताया है." बेंच ने कहा कि हालांकि न्यायिक समझ न्याय देने का एक जरूरी पहलू है, लेकिन यह कोर्ट इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि हिरासत में एक जैसी स्थिति वाले लोगों को अलग-अलग नतीजे मिल सकते हैं, जो संबंधित बेंच के अपनाए गए तरीके पर निर्भर करता है.
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