सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक समाधान की दिशा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह, ज्ञानवापी मस्जिद और संभल मस्जिद विवाद को वापस लोक अदालत में भेजा, नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों विवादी प्रसंगों को लोक अदालत में भेजा है। 'समाधान स्पेशल लोक अदालत' 21, 22 और 23 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी, कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल मस्जिद विवाद लोक अदालत में भेजा, दोनों पक्षों को नोटिस
'समाधान' नाम की यह स्पेशल लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 13, 2026 at 3:41 PM IST
|Updated : July 13, 2026 at 3:48 PM IST
नई दिल्ली (ANI): सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर-शाही ईदगाह मस्जिद और यूपी के संभल में विवादित शाही जामा मस्जिद के धार्मिक स्वरूप से जुड़े विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना तलाशने के लिए इसे एक स्पेशल लोक अदालत को सौंपा है. 'समाधान' नाम की यह स्पेशल लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी. कार्यवाही से पहले हिंदू और मुस्लिम पक्षों को प्री-लोक अदालत सुलह कार्यवाही में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं.
Supreme Court has referred the disputes with regard to the religious characters of the Gyanvapi mosque in Varanasi, Shri Krishna Janmabhoomi temple-Shahi Idgah mosque in Mathura and and disputed Shahi Jama Masjid in Sambhal, Uttar Pradesh to a Special Lok Adalat to explore the…
— ANI (@ANI) July 13, 2026
सुप्रीम कोर्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी के 5 जून के आदेश के अनुसार, चुने गए मामलों को स्पेशल लोक अदालत प्रक्रिया के ज़रिए सुलझाने के लिए सही माना गया है. नोटिस में कहा गया है, 'ध्यान दें कि भारत का माननीय सुप्रीम कोर्ट 'समाधान समारोह' आयोजित कर रहा है, जो 21 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और 21, 22 व 23 अगस्त 2026 को कोर्ट परिसर में स्पेशल लोक अदालत के साथ संपन्न होगा. आपके मामले को स्पेशल लोक अदालत में भेजने और उस पर सुनवाई के लिए उपयुक्त माना गया है.'
इस प्रक्रिया के तहत 5 जुलाई को मथुरा में लोक अदालत से पहले सुलह-समझौते के लिए एक बैठक हुई. जहां कुछ हिंदूवादी इस कार्यवाही में शामिल हुए, वहीं मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुए. मामले में आगे की कार्यवाही का इंतजार है. ये तीनों विवाद हिंदू याचिकाकर्ताओं के उन दावों से जुड़े हैं, जिनमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक मस्जिदें प्राचीन हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं. ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद 16वीं सदी के मूल काशी विश्वनाथ मंदिर की जगह पर बनाई गई थी, जिसे कथित तौर पर मुगल बादशाह औरंगजेब ने तुड़वा दिया था.
मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का विवाद 13.37 एकड़ के परिसर से जुड़ा है. हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद उसी जेल की कोठरी (गर्भ गृह) के ऊपर बनाई गई थी, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ माना जाता है.
शाही जामा मस्जिद का मामला 2024 में दायर एक याचिका से शुरू हुआ था. यह मामला हिंदू पक्ष के इस दावे पर केंद्रित है कि संभल में मुगल युग की शाही जामा मस्जिद (जो 1526 में बनकर तैयार हुई थी) असल में एक प्राचीन हरिहर मंदिर के ऊपर बनाई गई थी.
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