हमारा दो हमारे दो: क्या भारत में नियमित नागरिकों के लिए कानूनी परिणाम होंगे?
जनसंख्या समाधान फाउंडेशन ने विश्व जनसंख्या दिवस पर दो बच्चों का कानून बनाने की मांग की। इसके पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपकर जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यक्ता बताई और कहा कि यह शिक्षा, रोजगार और संसाधनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

सौजन्य से:- Hindustan
हम दो हमारे दो कानून बनाने की उठाई मांग
जनसंख्या समाधान फाउंडेशन ने विश्व जनसंख्या दिवस पर दो बच्चों का कानून बनाने की मांग की। इसके पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपकर जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यक्ता बताई और कहा कि यह शिक्षा, रोजगार और संसाधनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
जनसंख्या समाधान फाउंडेशन ने विश्व जनसंख्या दिवस पर देश में हम दो हमारे दो बच्चों का कानून बनाने की मांग उठाई। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में संस्था के पदाधिकारी व सदस्य शहर कोतवाली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार नितिन को सौंपा। ज्ञापन में देश में बढ़ती जनसंख्या को देश के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल और प्राकृतिक संसाधनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए अविलंब समान जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की गई। फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष सुन्दर कुमार आर्य ने कहा कि चीन जैसे देश ने कठोर जनसंख्या नीति से विकास किया है। भारत में जनसंख्या विस्फोट व जनसंख्या का संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है, इससे बेरोजगारी, गरीबी, प्रदूषण और सामाजिक असंतुलन बढ़ रहा है, जिससे देश में ग्रह युद्ध का भी ख़तरा बढ़ रहा है।
कानून के उल्लंघन पर सजा
उन्होंने मांग की कि कानून में दो बच्चों की नीति को अनिवार्य किया जाए और इसका उल्लंघन करने वालों को सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ने, सरकारी योजनाओं का लाभ व वोट का अधिकार जैसी सुविधाओं से वंचित किया जाए। साथ ही कानून का पालन करने वाले परिवारों को प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा।
ज्ञापन देने वाले सदस्य
ज्ञापन देने वालों में राजेंद्र गुर्जर, सुंदर कुमार आर्य, रविंद्र गुप्ता, कटार सिंह, महेन्द्र कुमार, मुकेश कुमार त्यागी, गुलशन त्यागी, धर्मेंद्र चौधरी, जयकरण बैसला, जयप्रकाश शर्मा, शशि गोयल, दुर्गेश तोमर, इश्वरी कुमारी सिसोदिया, विजयपाल सिंह आर्य, मुनेश त्यागी, श्याम वर्मा, विक्रांत राणा, विवेक कुमार परविंदर त्यागी आदि शामिल रहे।
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लेखक के बारे में
Mulit Tyagiमुलित त्यागी पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान हापुड़ में ब्यूरो इंचार्ज पर काम कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
मुलित त्यागी भारतीय मीडिया जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) हापुड़ ब्यूरो में इंचार्ज हैं। 2007 में गढ़मुक्तेश्वर में भूख से मौत प्रकरण में 44 दिनों तक विशेष खबरें की जिससे जरिए उन्हें पत्रकारिता में मजबूत पहचान मिली। भूख से गरीब की मौत, लखीमपुर में बाढ़ का दंश, बदायूं में दो बहनों की लाश पेड़ पर लटकाना, हापुड़ में अरबों रुपये कीमत की सेना की भूमि पर अवैध कब्जे पर बड़ी कार्रवाई जैसी खबरों का मुलित ने ब्रेक किया है।
कॅरियर का सफर
मुलित त्यागी ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2002 में दैनिक जागरण समाचार पत्र से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2003 में अमर उजाला के साथ जुड़े। अमर उजाला में जूनियर सब एडिटर रहते गढ़मुक्तेश्वर तहसील इंचार्ज बनें। 2012 तक वहीं पर लगातार काम किया। एक जनवरी 2013 को हिन्दुस्तान बरेली में ज्वाइन किया और फिर लखीमपुर जिले में ब्यूरो इंचार्ज बनें। 24 फरवरी 2014 को बदायूं जिले में जिम्मेदारी दी गई। अक्तूबर 2014 से हापुड़ ब्यूरो की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएससी बायोलॉजी के साथ-साथ बीए और राजनीति विज्ञान में एमए उत्तीर्ण।
कार्य और लक्ष्य
कई मामलों में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। मुलित का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
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