दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीडी पर निर्देश जारी किया, मतगणना के लिए विशेष गाइडलाइन पर आगे बढ़ें
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीडी चुनाव की मतगणना के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि मतगणना के दौरान पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए मत पत्रों को स्टोर करने के लिए सुरक्षित और बंद किए जाने योग्य ठिकानों पर रखा जाए। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने काउंटिंग स्टाफ के कड़ाई से वेरिफिकेशन और उनके सीधे प्रसारण पर भी जोर दिया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीडी का चुनाव दोबारा कराने से इनकार किया, मतगणना के दौरान मिली थी अनियमितता की शिकायतें
सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को बीसीडी के चुनाव की मतगणना पर रोक लगा दिया था.
Published : June 6, 2026 at 5:28 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) का चुनाव दोबारा कराने से इनकार कर दिया. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि भले ही चुनाव में कथित रुप से अनियमितताओं और बैलेट पेपर्स से छेड़छाड़ की शिकायतें मिली है, लेकिन कोर्ट दोबारा चुनाव कराने का आदेश नहीं देगा. कोर्ट ने मतगणना शुरू करने का आदेश दिया है, मतगणना वहीं से शुरू होगी जहां से बंद की गई थी.
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ बैलेट पेपर में छेड़छाड़ की शिकायत के आधार पर नये सिरे से चुनाव कराने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि जिस मत पत्र में जिसमें इरेजर, ओवरराईटिंग, करेक्शन या जोड़ने की शिकायत मिले उसे अलग कर उन्हें संदेहास्पद मत पत्र की श्रेणी वाले पैकेट में रखा जाए. इन संदेहास्पद मत पत्रों को एएसजी के समक्ष लाया जाए, जो ये तय करेंगे कि उनकी गिनती कैसे हो. उन पर एएसजी का ही अंतिम फैसला होगा.
कोर्ट ने कहा कि प्रथम वरीयता वाले मत पत्रों की गिनती की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि जो गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं उनमें प्रथम वरीयता वाले मत शामिल नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि मतगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मत पत्रों को बंद किए जाने लायक स्टोरेज में रखने, हाई रिजोल्यूशन कैमरे, सीसीटीवी कैमरे से लगातार निगरानी और उनका सीधा प्रसारण किया जाएगा. इसके अलावा, काउंटिंग स्टाफ का कड़ाई से वेरिफिकेशन किया जाए.
बता दें कि कई उम्मीदवारों ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) चुनाव के मतगणना में गड़बड़ी की शिकायत करते हुए याचिका दायर किया था. इसके पहले 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीडी के चुनाव की मतगणना पर रोक लगा दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट इस पर सुनवाई कर रही थी.
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