होमअपराधभारतीय कानून के आगे नहीं टिकेगा सोशल मीडिया: हाईकोर्ट की फटकार
अपराध

भारतीय कानून के आगे नहीं टिकेगा सोशल मीडिया: हाईकोर्ट की फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के सहयोग न करने के रवैये पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते।

8 जुलाई 2026 को 06:57 am बजे
भारतीय कानून के आगे नहीं टिकेगा सोशल मीडिया: हाईकोर्ट की फटकार

सौजन्य से:- Hindustan

भारत के कानून से ऊपर नहीं हैं कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म; हाईकोर्ट से एक्स को तगड़ी फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के सहयोग न करने के रवैये पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते।

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) के सहयोग न करने के रवैये पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते। स्पष्ट किया कि भारतीय कानून का दायरा इतना व्यापक है कि वह किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकता है और दोषियों को न्याय के कटघरे में ला सकता है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट एवं न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने साइबर अपराध के एक मामले में सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया मंच X के अधिकारियों का पुलिस जांच में सहयोग न करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया मंच भारतीय कानूनों और कानून के तहत कार्य कर रही जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से मुक्त नहीं हैं। भारतीय कानून के हाथ इतने लंबे हैं कि वे किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकते हैं और इतने मजबूत हैं कि दोषियों को न्याय के कठघरे तक ला सकें। मामले में जांच अधिकारी ने कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि एक्स ने उस खाते का यूआरएल पहचान विवरण और आईपी पता उपलब्ध नहीं कराया, जिससे याची मिथिलेश कुमार के अश्लील वीडियो और तस्वीरें साझा की गई थीं।

जांच अधिकारी ने कहा कि इस असहयोग के कारण वह मामले में आगे बढ़ने में असमर्थ हैं और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह हलफनामा पुलिस व्यवस्था की विफलता स्वीकार करने जैसा प्रतीत होता है। एक ओर एक्स के जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच में बाधा उत्पन्न की, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने भी अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। याची मिथिलेश कुमार ने याचिका दाखिल कर गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को निर्देश देने की मांग की कि उनकी एफआईआर की निष्पक्ष, प्रभावी और शीघ्र जांच पूरी कराई जाए।

प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल जमानत रद्द करने के लिए नहीं किया जा सकता

हाईकोर्ट ने एक अन्य आदेश में कहा है कि जेल में बंद व्यक्ति के खिलाफ नजरबंदी आदेश तभी वैध माना जा सकता है, जब हिरासत लेने वाले अधिकारी के पास ठोस सामग्री हो कि रिहा होने पर व्यक्ति फिर वैसी ही गतिविधियों में लिप्त होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निवारक नजरबंदी को जमानत आदेशों को निष्प्रभावी करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने आगरा निवासी विजय गोयल की निवारक नजरबंदी को रद्द करते हुए दिया है।

कोर्ट ने याची को तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि याची के मामले में न तो डीएम, न केंद्र सरकार और न ही सलाहकार बोर्ड ने कोई तर्कसंगत आदेश किया। सभी आदेशों में न्यायिक विवेक के प्रयोग का अभाव पाया गया। विजय गोयल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट से जुड़े चार मामलों के आधार पर प्रदेश सरकार के गृह सचिव ने निवारक नजरबंदी का आदेश जारी किया था जबकि चारों मामलों में विजय को हाईकोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी थी।

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

और पढ़ें

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करो, देशव्यापी विश्वास बढ़ेगा: अशोक गहलोत
अपराध

राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करो, देशव्यापी विश्वास बढ़ेगा: अशोक गहलोत

निज्जर हत्याकांड का कनाडाई अदालत का बड़ा फैसला, ट्रायल अब 2028 में
अपराध

निज्जर हत्याकांड का कनाडाई अदालत का बड़ा फैसला, ट्रायल अब 2028 में

दहेज की राशि में पैतृक संपत्ति की मांग भी गिनी जा सकती है: कलकत्ता हाईकोर्ट
अपराध

दहेज की राशि में पैतृक संपत्ति की मांग भी गिनी जा सकती है: कलकत्ता हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का DMK को सख्त संदेश: न्यायालय को राजनीति का मंच न बनाएं
अपराध

सुप्रीम कोर्ट का DMK को सख्त संदेश: न्यायालय को राजनीति का मंच न बनाएं

झारखंड HC ने JAP कांस्टेबल की बर्खास्तगी को रद्द किया, व्यभिचार अब कोई आपराधिक अपराध नहीं है
अपराध

झारखंड HC ने JAP कांस्टेबल की बर्खास्तगी को रद्द किया, व्यभिचार अब कोई आपराधिक अपराध नहीं है

बाल विवाह पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने कहा, सभी धर्मों पर समान रूप से लागू है कानून
अपराध

बाल विवाह पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने कहा, सभी धर्मों पर समान रूप से लागू है कानून

मुस्लिम लड़कियों की शादी की उम्र पर बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने कहा- पर्सनल लॉ से ऊपर हैं कानून
अपराध

मुस्लिम लड़कियों की शादी की उम्र पर बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने कहा- पर्सनल लॉ से ऊपर हैं कानून

भारतीय कानून के दायरे में आएंगे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म
अपराध

भारतीय कानून के दायरे में आएंगे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म

ताज़ा ख़बरें