सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भूपेश बघेल को मिला झटका
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है, कोर्ट ने उनकी याचिका को रद्द करने से मना कर दिया है. यह याचिका पाटन सीट से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को रद्द करने के लिए थी. अब इस मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई होगी.

सौजन्य से:- ABP News
भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नहीं मानी याचिका रद्द करने की मांग
Supreme Court: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. पाटन सीट से अपने निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को रद्द करने की मांग की थी.
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. बघेल ने पाटन सीट से अपने निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को रद्द करने की मांग की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे मना कर दिया. इस आदेश के बाद उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है.
क्या है मामला?
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल पाटन सीट से चुने गए थे. उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए बीजेपी प्रत्याशी विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की. याचिका में आरोप लगाया गया कि मतदान 48 घंटे पहले प्रचार बंद करने के नियम का भूपेश बघेल ने पालन नहीं किया. उन्होंने इस दौरान रोड शो किया और सभा को भी संबोधित किया. याचिकाकर्ता ने इसे जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन बताया है.
बघेल की दलील
पूर्व मुख्यमंत्री के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर याचिकाकर्ता के दावे को सही मान लें, तब भी वह धारा 126 के उल्लंघन का मामला बनता है. इसे भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता. भ्रष्ट आचरण धारा 123 के तहत आता है. सिब्बल ने यह भी कहा कि भूपेश बघेल पर 200 लोगों से मिलने का आरोप है, लेकिन वह लगभग 20 हजार वोटों के अंतर से जीते. इसका साफ मतलब है कि इस कथित उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा. इसलिए, चुनाव याचिका पर विचार का कोई आधार ही नहीं बनता.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने भूपेश बघेल की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया. जजों ने कहा कि बघेल को हाई कोर्ट में चुनाव याचिका की सुनवाई में अपनी कानूनी और तथ्यात्मक दलीलें देनी चाहिए. धारा 126 के कथित उल्लंघन का चुनाव नतीजों पर कोई असर पड़ा था या नहीं, यह तथ्यों का सवाल है. इसे साक्ष्यों के आधार पर ही तय किया जा सकता है.
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