जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी: दिल्ली पुलिस का दावा, कानून व्यवस्था बनाए रखना था मकसद
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी का मकसद कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, न कि किसी की निजता का उल्लंघन करना। पुलिस की ओर से यह जवाब एक याचिका के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें प्रदर्शनकारियों की लगातार निगरानी को चुनौती दी गई है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान की गई वीडियोग्राफी का मकसद कानून-व्यवस्था बनाये रखना है
पुलिस की ओर से कहा गया कि वीडियोग्राफी का संबंध केवल कानून-व्यवस्था से था. किसी की निजता का हनन नहीं किया जा रहा था.
Published : July 20, 2026 at 8:36 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी की ओर से जारी प्रदर्शन में जुटे प्रदर्शनकारियों का लगातार पुलिस कैमरे से निगरानी का उसका मकसद केवल कानून व्यवस्था बनाये रखना था न कि किसी की निजता के उल्लंघन. दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट को ये सूचना दी. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी.
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग करने का मकसद केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है. ये एक हकीकत है कि सैकड़ों लोग वीडियो बना रहे थे और उसका रील बनाकर उसे वायरल कर रहे थे. पुलिस की ओर से की जा रही वीडियोग्राफी का संबंध केवल कानून-व्यवस्था से था. किसी की निगरानी या उसकी निजता का हनन नहीं किया जा रहा था. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर है. चीफ जस्टिस ने कहा कि मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम केंद्र सरकार के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे दिशानिर्देश दिए हैं. वैसे ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर होना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या ऐसा कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर है.
याचिका जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर की है. याचिका में जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी की ओर से जारी प्रदर्शन में जुटे प्रदर्शनकारियों का लगातार पुलिस कैमरे से निगरानी को चुनौती दी गई है. वकील सुभाष चंद्रन और अनिरुद्ध केपी के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर स्थायी सर्विलांस कैमरे से लगातार नजर रखी जा रही थी. यहां तक कि महिलाओं और लड़कियों के रात में सोने के दौरान भी कैमरे से नजर रखी जा रही थी. दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर कैमरे से लगातार नजर रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
याचिका में कहा गया कि आइशी घोष 20 जून से लगातार प्रदर्शन हिस्सा ले रही हैं. प्रदर्शनकारियों के खाने और आराम करने के समय का भी वीडियो फिल्माया जा रहा है. साथ ही आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से कुछ छात्रों को धमकी दी गई कि उनका फोटो और वीडियो उनके अभिभावकों और उन संस्थानों को भेज देंगे जहां से वो पढ़ाई कर रहे हैं. इसकी वजह से कई लोग प्रदर्शन में हिस्सा लेने से कतरा रहे हैं. यह भी कहा गया कि पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के वीडियो उस हालत में भी बनाए जब भारी बारिश के दौरान वे भीगी हुईं थीं. ऐसा करना शारीरिक निजता और गरिमा का घोर उल्लंघन है. दिल्ली पुलिस से बार-बार ये पूछा गया कि लगातार नजर रखने का अधिकार किसने दिया या किस कानूनी प्रावधान से वे ऐसा कर रहे हैं तो उसका कोई जवाब नहीं दिया गया.
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