सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कानून की चुनौती पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय की
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और उसके नियमन से जुड़े कानून की चुनौती पर अंतिम सुनवाई करने के लिए सहमति जताई। कानून 2026 में लागू हुआ था और याचिका में ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने की मांग की गई है।

सौजन्य से:- livehindustan.com
ऑनलाइन गेमिंग कानून संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 'ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और उसके नियमन' से जुड़े कानून की चुनौती पर अंतिम सुनवाई करने के लिए सहमति जताई। यह कानून 2026 में लागू हुआ था और जनहित याचिका में ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने की माँग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को ‘ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और उसके नियमन से जुड़े कानून’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं के समूह पर अंतिम सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। यह कानून 2026 में लागू हुआ था। शीर्ष अदालत ‘सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज' (सीएएससी) द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए भी सहमत हो गई। याचिका में केंद्र सरकार को ऐसे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो कथित तौर पर सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम की आड़ में चल रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित सभी पक्षों के वकीलों से कहा कि वे इस बीच अपनी दलीलें और कागजी कार्रवाई पूरी कर लें।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, सीएएससी की ओर से पेश वकील विराग गुप्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने केंद्र से 17 अक्तूबर, 2025 को उनकी याचिका पर जवाब देने को कहा था। उन्होंने कहा कि पीठ और केंद्र को 2,000 गेमिंग ऐप्स की एक सूची सौंपी गई थी, जो कानून के बावजूद भारत में सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियां चला रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो आदेशों के बावजूद, सरकार ने अभी तक याचिका पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया है।
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