सावन में ज्ञानवापी में जलाभिषेक की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, कल होगी सुनवाई
ज्ञानवापी परिसर में सीलबंद हिस्से में मौजूद कथित शिवलिंग के दर्शन, पूजा और जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. हिंदू पक्ष का कहना है कि यदि अदालत अनुमति देती है तो वह कोर्ट की सभी शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करेगा. यह मामला क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे विवाद का हिस्सा है, जो वाराणसी स्थित मस्जिद पर हिंदू पक्ष के दावे के बाद शुरू हुआ था।

सौजन्य से:- ndtv.in
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है. हिंदू पक्ष ने शीर्ष अदालत में नई याचिका दाखिल कर सावन के पवित्र महीने में सीलबंद क्षेत्र में मौजूद कथित शिवलिंग की पूजा, दर्शन और जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग की है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. हिंदू पक्ष का कहना है कि यदि अदालत अनुमति देती है तो वह कोर्ट की सभी शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह पालन करेगा.
क्या है हिंदू पक्ष की नई मांग?
हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने यह याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है. ऐसे में सीलबंद क्षेत्र में मौजूद कथित शिवलिंग के दर्शन, पूजा और जलाभिषेक की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ताओं ने भरोसा दिलाया है कि पूजा सीमित दायरे में होगी और किसी भी तरह से अदालत के निर्देशों या कानून-व्यवस्था का उल्लंघन नहीं किया जाएगा.
2022 के सर्वे के बाद शुरू हुआ नया विवाद
ज्ञानवापी परिसर में 15 मई 2022 को एडवोकेट कमिश्नर की निगरानी में हुए सर्वे के दौरान एक ऐसी संरचना मिलने का दावा किया गया था जिसे हिंदू पक्ष प्राचीन शिवलिंग बताता है. वहीं मुस्लिम पक्ष लगातार कहता रहा है कि वह शिवलिंग नहीं बल्कि वजूखाने का फव्वारा है. इसी विवाद के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.
20 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए उस स्थान को सीलबंद रखने का निर्देश दिया था ताकि विवादित संरचना सुरक्षित रहे. तब से यह हिस्सा सील है और वहां आम लोगों की आवाजाही पर रोक है.
ज्ञानवापी विवाद का पूरा बैकग्राउंड
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर को लेकर कई मुकदमे अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं. हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थान मूल रूप से भगवान आदि विश्वेश्वर का प्राचीन मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई. दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इस दावे को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक मस्जिद बताता है. इसी विवाद के चलते पूजा के अधिकार, सर्वे और अन्य कानूनी मुद्दों पर लगातार सुनवाई चल रही है.
हाल ही में हाईकोर्ट में क्या हुआ था?
कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में वजूखाना क्षेत्र के एएसआई सर्वे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इसी विषय से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी विचार कर रहा है. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तारीख 24 अगस्त तय कर दी. अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर है, जहां सावन के दौरान कथित शिवलिंग की पूजा, दर्शन और जलाभिषेक की अनुमति संबंधी नई याचिका पर होने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित विवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है.
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