आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल नागरिकता में घुसपैठिए ले रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की है। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता और निवास के सबूत के तौर पर नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि केवल पहचान की पुष्टि के लिए ही आधार कार्ड का उपयोग किया जाए।

सौजन्य से:- ETV Bharat
क्या आधार कार्ड से घुसपैठिए ले रहे हैं नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस
याचिका में कहा गया- आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास स्थान और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है.
By Sumit Saxena
Published : June 16, 2026 at 1:50 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है. याचिका में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास स्थान और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है.
इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि आधार कार्ड का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि के लिए ही सीमित किया जाए. वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहाना की बेंच के सामने सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
इसके साथ ही इस याचिका को पहले से लंबित इसी तरह के अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया गया है. याचिका में केंद्र सरकार, राज्यों और चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सुनिश्चित करें कि आधार का उपयोग केवल पहचान के सबूत के तौर पर हो, न कि नागरिकता, निवास स्थान, पते या जन्म तिथि के सबूत के रूप में.
वकील अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म में आधार कार्ड को जन्म तिथि और निवास के सबूत के रूप में इस्तेमाल करना गैर-कानूनी माना जाए. याचिका के अनुसार, ऐसा करना आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है.
याचिका में तर्क दिया गया है कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 में साफ तौर पर लिखा है कि 'आधार नागरिकता या निवास स्थान (डोमिसाइल) का सबूत नहीं है.' याचिका में यह भी कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना (notification) में स्पष्ट रूप से लिखा है कि 'आधार केवल पहचान का सबूत है, नागरिकता, पते या जन्म तिथि का नहीं.'
याचिका के अनुसार, "इसके बावजूद, आधार का उपयोग न केवल स्कूल में दाखिले, संपत्ति की खरीद, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए उम्र, नागरिकता और निवास के सबूत के तौर पर किया जा रहा है, बल्कि नए मतदाता पंजीकरण के आवेदन फॉर्म (फॉर्म-6) में भी इसे जन्म तिथि और पते के सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी वजह से, घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी आधार का उपयोग करके विभिन्न सरकारी दस्तावेज हासिल कर रहे हैं."
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