जमानत पर जश्न मनाने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में ले जाने का आदेश
तीन साल से अधिक जेल सजा के बाद जमानत मिलने पर आरोपी ने विजय जुलूस निकाला और गवाहों को डराने का आरोप लगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए पुलिस को गैर‑जमानती वारंट के तहत उसे गिरफ्तार कर 21 सितंबर 2026 को पेश करने का निर्देश दिया, साथ ही पहले सरेंडर करने की हिदायत दी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
चरखी दादरी हत्या मामले में तीन साल बाद जमानत पर बाहर आए आरोपी ने कथित तौर पर विजय जुलूस निकाला और गवाहों को धमकाया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को आरोपी को हिरासत में लेकर 21 सितंबर को पेश करने का आदेश दिया।
सुरेन्द्र कुमार, चरखी दादरी: हरियाणा के चरखी दादरी जिले में हत्या के मामले में तीन साल से अधिक समय जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए आरोपी विशाल को जमानत मिलने की खुशी में कथित तौर पर विजय जुलूस निकालना भारी पड़ गया। मामले में गवाहों को धमकाने के आरोपों और जमानत के बाद विजय जुलूस निकाले जाने की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को आरोपी को हिरासत में लेकर अपने समक्ष पेश करने का आदेश दिया है।
विजय जुलूस निकालना उचित नहीं
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकालना उचित नहीं है। कोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया कि पहले वह सरेंडर करे और उसके बाद जमानत के लिए आवेदन करे। कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपी के खिलाफ अगस्त में जारी किया गया गैर-जमानती वारंट अभी तक तामील नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने चरखी दादरी के एसपी को निर्देश दिया है कि आरोपी के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को अमल में लाया जाए और उसे हिरासत में लेकर अगली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति एसपी को 24 घंटे के भीतर ईमेल समेत अन्य माध्यमों से भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
मामला 27 अक्टूबर 2022 का है। जानकारी के अनुसार, एक विवादित प्लॉट पर टिन के शेड बनाने को लेकर विशाल और शिकायतकर्ता राजबाला के परिवार के बीच विवाद हुआ था। कहासुनी के दौरान विशाल पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप लगा। इस घटना में शिकायतकर्ता पक्ष के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे और इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने विशाल को गिरफ्तार किया था और वह तीन साल से अधिक समय तक जेल में रहा।
चार बार याचिका खारिज होने के बाद मिली थी जमानत
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने विशाल की जमानत याचिका पहले चार बार खारिज कर दी थी। पांचवीं बार 23 अप्रैल को हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। इस दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया था कि मामले के महत्वपूर्ण गवाहों के बयान हो चुके हैं और आरोपी तीन साल से अधिक समय से हिरासत में है। सुप्रीम कोर्ट में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद विशाल ने कथित तौर पर गवाहों को धमकाया और इसके बाद विजय जुलूस भी निकाला।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा सरेंडर करे या फिर जमानत मांगे
8 सितंबर को सुनवाई के दौरान विशाल अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में पेश हुआ था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह पहले सरेंडर करे और फिर जमानत मांगे। पीठ ने जमानत के बाद विजय जुलूस निकाले जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जमानत मिलने पर इस तरह विजय जुलूस निकालना सही नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा पुलिस के सामने आरोपी विशाल को गैर-जमानती वारंट के तहत हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
लेखक के बारे मेंराहुल महाजनराहुल महाजन नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों की खबरें कवर करते हैं। पत्रकारिता में उनका अनुभव 12 साल से अधिक का है। राहुल महाजन ने सितंबर 2022 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। इससे पहले उन्होंने न्यूज़18 हिंदी में छह साल तक बतौर वरिष्ठ संवाददाता काम किया। 2014 में जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। वहां उन्होंने बतौर कॉपी एडिटर काम किया। दो साल तक टीवी में काम करने के बाद राहुल ने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। 2016 से अब तक यह सफर लगातार जारी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वह @rahuljuly14 के नाम से सक्रिय हैं।
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