DM मेधा रूपम ने हाई कोर्ट के वेतन‑वसूली आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी के एनएसए हिरासत को गैर‑कानूनी करार दिया और अधिकारियों की निजी सैलरी से 5 लाख रुपये वसूली का आदेश दिया था। इस आदेश को उत्तर प्रदेश की डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर चुनौती दी है, जबकि हाई कोर्ट ने पहले एनएसए आरोप रद्द कर दिए और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी निंदा की थी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
DM Medha Roopam News: इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी मामले में डीएम के निजी सैलरी से 5 लाख रुपये की वसूली के आदेश का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाए जाने का है। डीएम मेधा रूपम ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी को मुआवजे के तौर पर उनकी निजी सैलरी से 5 लाख रुपये वसूलने का निर्देश दिया गया था। आकृति को नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
हाई कोर्ट का आया आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी के बाद आकृति चौधरी की NSA हिरासत को गैर-कानूनी करार दिया था। हाई कोर्ट ने पुलिस की थ्योरी को खारिज कर दिया और प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के बारे में कड़ा संदेश दिया। साथ ही, नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि के लिए मज़दूरों के आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ छात्रा आकृति चौधरी पर लगाए गए एनएसए के आरोपों को भी रद्द कर दिया।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले की गहन जांच के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि राज्य पुलिस और जिला प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन वे उन्हें साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या वीडियो फुटेज पेश करने में विफल रहे।
हाई कोर्ट में स्थिति हुई साफ
हाई कोर्ट के सामने यह बात स्पष्ट हो गई कि आकृति चौधरी को 11 अप्रैल को पुलिस हिरासत में ले लिया गया था, जबकि इलाके में असली हिंसा 13 अप्रैल को भड़की थी। बेंच ने सवाल किया कि जो व्यक्ति पहले से ही पुलिस हिरासत में है, उसे बाद में हुई हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए कैसे ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके अलावा, बीएनएसएस की धारा 130 के तहत जारी नोटिस गिरफ्तारी के बाद तैयार की गई महज एक औपचारिकता पाई गई।
एनएसए को बताया कठोर
हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन की ओर से छात्रा पर एनएसए लगाए जाने को अत्यधिक कठोर और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सख्त निवारक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल किसी नागरिक को जमानत के सामान्य अधिकार से वंचित करने के हथियार के तौर पर नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य मशीनरी बिना ठोस सबूत के केवल अपनी राय और अनुमानों के आधार पर किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करती है, तो अदालतें मूक दर्शक नहीं बनी रहेंगी।
कोर्ट ने दिया मुआवजे का आदेश
हाई कोर्ट ने याचिका को मंजूरी करते हुए राज्य सरकार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने खास तौर पर जोर दिया कि मुआवजे की यह रकम सरकारी खजाने से नहीं दी जाएगी, बल्कि इसे उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाएगा, जिन्होंने इसमें भूमिका निभाई थी। इनमें डीएम भी शामिल हैं, जिन्होंने मनमाना फैसला लिया था। साथ ही, शुरुआती रिपोर्ट तैयार करने वाले एसएचओ और मामले से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।
विशेषज्ञता- राजनीतिक खबरों का विश्लेषण, क्राइम की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासनिक हलचल को लेकर इनसाइड स्टोरी, सरकार के फैसलों का आम लोगों पर असर का विश्लेषण।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत
राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा:
राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें
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