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जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकाला, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया: आरोपी को अदालत में पेश करो

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक आरोपित पर निर्देश दिया कि उसे न्यायालय में पेश किया जाए क्योंकि उसने जमानत मिलने के बावजूद विजय जुलूस निकाला और गवाहों को धमकाया। अदालत ने गैर-जमानती वारंट के बावजूद पुलिस कार्रवाई न करने की निंदा करते हुए आरोपी को 21 सितंबर की सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया।

13 सितंबर 2026 को 05:05 pm बजे
जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकाला, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया: आरोपी को अदालत में पेश करो

सौजन्य से:- Jagran

हत्या के आरोपी ने जमानत मिलने के बाद निकाला विजय जुलूस, नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अदालत में पेश करो

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मिलने के बाद हत्या के एक आरोपित द्वारा 'विजय जुलूस' निकालने के मामले को गंभीरता से ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक आरोपित द्वारा जमानत मिलने के बाद ‘विजय जुलूस’ निकालने के मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा पुलिस को निर्देश दिया है कि वह आरोपित को न्यायालय में पेश करे।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपित के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश नहीं किया गया।

पीठ ने शिकायतकर्ता के वकील की इस दलील का संज्ञान लिया कि आरोपित विशाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद ‘विजय जुलूस’ निकाला था और गवाहों को धमकाया था।

हत्यारोपित के विजय जुलूस पर गंभीरता दिखाई

अदालत ने मामले पर आठ सितंबर को सुनवाई के दौरान गौर किया कि आरोपित की ओर से उसका वकील पेश हुआ था। पीठ ने आरोपित को पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और उसके बाद जमानत का अनुरोध करने को कहा। साथ ही पीठ ने फटकार लगाते हुए कहा- ‘जमानत मिलने पर विजय जुलूस निकालना उचित नहीं है।’

अदालत ने यह भी कहा कि अगस्त में जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट पर अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। शीर्ष अदालत ने चरखी दादरी जिले के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि गैर-जमानती वारंट के तहत कार्रवाई की जाए और आरोपित को सुनवाई की अगली तारीख 21 सितंबर को इस अदालत में पेश किया जाए।

पीठ ने न्यायालय की रजिस्ट्री को आदेश की एक प्रति 24 घंटे के भीतर ई-मेल और अन्य माध्यमों से पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया।

कार्रवाई न होने पर पीठ ने फटकार लगाई

हाई कोर्ट ने हत्या के मामले में आरोपित को 23 अप्रैल को जमानत दी थी। यह घटना 27 अक्टूबर 2022 की है, जिसके बाद विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया था और वह तीन वर्ष से अधिक समय तक हिरासत में रहा।

शिकायतकर्ता राजबाला के परिवार के सदस्यों और आरोपित के बीच उस समय विवाद हुआ था, जब विशाल ने एक विवादित भूखंड पर टिन शेड का कथित रूप से निर्माण शुरू कर दिया था।

आरोप है कि तीखी कहासुनी के दौरान विशाल ने कई लोगों पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और इनमें से एक व्यक्ति की बाद में मौत हो गई।

हाई कोर्ट ने विशाल की जमानत याचिका चार बार खारिज की थी, लेकिन पांचवीं बार यह बताए जाने के बाद उसे जमानत दे दी गई कि मामले में महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और आरोपित तीन वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिता चुका है।

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