तमिलनाडु : सरकारी नौकरियों में तमिल माध्यम से शिक्षित लोगों को प्राथमिकता, राज्यपाल ने कानून में संशोधन को दी मंजूरी
तमिलनाडु : सरकारी नौकरियों में तमिल माध्यम से शिक्षित लोगों को प्राथमिकता, राज्यपाल ने कानून में संशोधन को दी मंजूरी यह भी कहा गया है कि यह नया नियम संशोधन प्रकाशित होने से पहले घोषित की गई प्राथमिकता वाली रिक्तियों पर ल…

सौजन्य से:- ETV Bharat
तमिलनाडु : सरकारी नौकरियों में तमिल माध्यम से शिक्षित लोगों को प्राथमिकता, राज्यपाल ने कानून में संशोधन को दी मंजूरी
यह भी कहा गया है कि यह नया नियम संशोधन प्रकाशित होने से पहले घोषित की गई प्राथमिकता वाली रिक्तियों पर लागू नहीं होगा.
Published : August 26, 2026 at 3:52 PM IST
चेन्नई: तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कानून में उस संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत तमिल माध्यम से पढ़ाई करने वालों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी. तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों में तमिल माध्यम से पढ़े-लिखे लोगों को प्राथमिकता देने के लिए 2010 में एक कानून लाया गया, जिसके तहत उन्हें 20 प्रतिशत सीधी नियुक्ति दी जाती है.
इस कानून के आधार पर, तमिल माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने वालों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी गई. इसमें इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया कि संबंधित व्यक्ति पहले से ही सरकारी सेवा में है और उसने किसी दूसरी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया है.
इसे रोकने के लिए मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो लोग पहले से सरकारी नौकरी में हैं, वे तमिल में पढ़ाई करने के आधार पर प्राथमिकता पाने के हकदार नहीं हैं.
इसके बाद, पिछले साल विधानसभा में एक संशोधन बिल पास किया गया था, जिसमें तमिल भाषा में पूरी शिक्षा प्राप्त करने वाले नए सरकारी कर्मचारियों की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत प्राथमिकता देने का प्रावधान था. इस बिल को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया था. अब राज्यपाल अर्लेकर ने इस संशोधन को मंजूरी दे दी है.
संशोधित कानून के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरियों में तमिल-शिक्षित लोगों के लिए आरक्षित प्राथमिकता वाली रिक्ति पर पहले ही प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जा चुका है, तो वह उसी तरह की प्राथमिकता वाली रिक्ति के लिए दोबारा प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता.
इसके साथ ही, उन लोगों पर दोबारा वही विशेष सुविधा लेने पर रोक लगा दी गई है, जिन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए तमिल में शिक्षा प्राप्त करने वालों को मिलने वाली विशेष सुविधा का एक बार लाभ उठाया है. हालांकि, कानून के अनुसार यह प्रतिबंध ज़्यादा सैलरी वाले पद पर लागू नहीं होता है. यानी, जिस व्यक्ति को पहले ही प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जा चुका है, वह ज़्यादा सैलरी वाले पद की प्राथमिकता वाली वैकेंसी के लिए मुकाबला कर सकता है.
यह भी बताया गया है कि यह नया नियम संशोधन के प्रकाशन से पहले घोषित प्राथमिकता वाली रिक्तियों पर लागू नहीं होगा. इसलिए, संशोधन के प्रकाशन से पहले घोषित रिक्तियों के लिए प्रक्रियाएं पहले से लागू नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी.
इस बीच, 7 सितंबर 2010 से लेकर सरकारी गजट में इस संशोधन के प्रकाशन की तारीख तक प्राथमिकता वाली रिक्तियों के संबंध में जारी की गई घोषणाओं, की गई नियुक्तियों और की गई कार्रवाइयों को कानूनी मान्यता दे दी गई है. यह प्राथमिकता वाली नियुक्तियों और उनसे जुड़ी उन गतिविधियों के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है जो पहले ही की जा चुकी हैं.
सीधी नियुक्ति
इसके अलावा, 'सीधी नियुक्ति' की परिभाषा में भी संशोधन किया गया है. इसके तहत यह स्पष्ट किया गया है कि सीधी नियुक्ति का अर्थ है मौजूदा नियमों और आदेशों के अनुसार खुली प्रतियोगी परीक्षा, साक्षात्कार या दोनों के माध्यम से सरकारी सेवा में नियुक्ति.
ये भी पढ़ें- मुख्यमंत्री संगमा ने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए 'सीएम इम्पैक्ट रीड एंड राइज मेघालय' लॉन्च किया
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