सुप्रीम कोर्ट का फैसला: निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस में सरकारी कॉलेजों के बराबर लेने से मुक्त
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इससे सभी निजी कॉलेज बंद हो सकते हैं। शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया जिसमें निजी कॉलेजों में फीस को कम करने या सरकारी संस्थानों के बराबर करने का वादा किया गया था।

सौजन्य से:- Live Hindustan
...तो सारे निजी मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे बंद : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इससे सभी निजी कॉलेज बंद हो सकते हैं। एक छात्र की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने निजी कॉलेजों में फीस को चुनौती देने का समर्थन नहीं किया।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि ऐसा किया गया तो सारे निजी मेडिकल कॉलेज बंद हो जाएंगे। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने निजी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के एक छात्र की अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क को कम करने या सरकारी संस्थानों के बराबर करने से इनकार कर दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ‘यह नहीं कहा जा सकता कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर ही फीस लेनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘कोई यह नहीं कह सकता कि निजी संस्थानों में फीस बहुत अधिक है और उसे सरकारी संस्थानों के बराबर कर दिया जाए।’ जब याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि राजस्थान में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस 25 लाख रुपये तक है तो इस पर पीठ ने कहा कि छात्रों के पास स्कॉलरशिप पाने का विकल्प भी मौजूद है। पीठ ने कहा कि ‘इस देश में डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे में निजी संस्थानों को सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने के लिए मजबूर किया गया तो वे (निजी मेडिकल कॉलेज) बंद हो जाएंगे।’ यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हमें हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई उचित कारण नहीं दिखता। इसलिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील खारिज की जाती है।’दरअसल, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के एक छात्र ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया था कि राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस 18.90 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए तय आठ लाख रुपये की आय सीमा के हिसाब से बिल्कुल भी सही नहीं है। हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के फीस में दखल देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि फीस रेगुलेटरी कमेटी का यह कर्तव्य है कि वह फीस का ऐसा ढांचा बनाए जो तर्कसंगत, निष्पक्ष और कम आय वर्ग के उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति के अनुकूल हो।
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