होम›वकील›सुप्रीम कोर्ट का फैसला: निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस में सरकारी कॉलेजों के बराबर लेने से मुक्त
वकील

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस में सरकारी कॉलेजों के बराबर लेने से मुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इससे सभी निजी कॉलेज बंद हो सकते हैं। शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया जिसमें निजी कॉलेजों में फीस को कम करने या सरकारी संस्थानों के बराबर करने का वादा किया गया था।

24 जून 2026 को 05:58 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस में सरकारी कॉलेजों के बराबर लेने से मुक्त

सौजन्य से:- Live Hindustan

...तो सारे निजी मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे बंद : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इससे सभी निजी कॉलेज बंद हो सकते हैं। एक छात्र की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने निजी कॉलेजों में फीस को चुनौती देने का समर्थन नहीं किया।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर शुल्क लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि ऐसा किया गया तो सारे निजी मेडिकल कॉलेज बंद हो जाएंगे। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने निजी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के एक छात्र की अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क को कम करने या सरकारी संस्थानों के बराबर करने से इनकार कर दिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ‘यह नहीं कहा जा सकता कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी संस्थानों के बराबर ही फीस लेनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘कोई यह नहीं कह सकता कि निजी संस्थानों में फीस बहुत अधिक है और उसे सरकारी संस्थानों के बराबर कर दिया जाए।’ जब याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि राजस्थान में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस 25 लाख रुपये तक है तो इस पर पीठ ने कहा कि छात्रों के पास स्कॉलरशिप पाने का विकल्प भी मौजूद है। पीठ ने कहा कि ‘इस देश में डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे में निजी संस्थानों को सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने के लिए मजबूर किया गया तो वे (निजी मेडिकल कॉलेज) बंद हो जाएंगे।’ यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हमें हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई उचित कारण नहीं दिखता। इसलिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील खारिज की जाती है।’दरअसल, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के एक छात्र ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया था कि राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस 18.90 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए तय आठ लाख रुपये की आय सीमा के हिसाब से बिल्कुल भी सही नहीं है। हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के फीस में दखल देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि फीस रेगुलेटरी कमेटी का यह कर्तव्य है कि वह फीस का ऐसा ढांचा बनाए जो तर्कसंगत, निष्पक्ष और कम आय वर्ग के उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति के अनुकूल हो।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट के पद के लिए कलीजियम ने सिफ़ारिश की
वकील

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट के पद के लिए कलीजियम ने सिफ़ारिश की

हाईकोर्ट ने मांगी आवारा कुत्तों की कार्रवाई की रिपोर्ट, सरकार ने छह महीने में 15,000 से अधिक नसबंदी‑टीकाकरण किया
वकील

हाईकोर्ट ने मांगी आवारा कुत्तों की कार्रवाई की रिपोर्ट, सरकार ने छह महीने में 15,000 से अधिक नसबंदी‑टीकाकरण किया

सरकारी वकीलों के लिए नया ढांचा: 2026 के अध्यादेश से नई भूमिका और लाभ
वकील

सरकारी वकीलों के लिए नया ढांचा: 2026 के अध्यादेश से नई भूमिका और लाभ

सुप्रीम कोर्ट के लिये टelangाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर कोलेजियम की सिफ़ारिश
वकील

सुप्रीम कोर्ट के लिये टelangाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर कोलेजियम की सिफ़ारिश

राष्ट्रीय हाईवे 2 पर अवरोध हटाए, मनिपुर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया
वकील

राष्ट्रीय हाईवे 2 पर अवरोध हटाए, मनिपुर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया

सुप्रीम कोर्ट के जज बने लखनऊ के न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय
वकील

सुप्रीम कोर्ट के जज बने लखनऊ के न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित किया
वकील

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित किया

सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक: सरकार को नियम बनाने का निर्देश
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक: सरकार को नियम बनाने का निर्देश

ताज़ा ख़बरें