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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बताया खत्म हो जाता है नोटरी तलाक का सारा, जाने तलाक क्या है और तलाक कैसे होता है?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि भारतीय कानून में विवाह का विधिक विच्छेद केवल सक्षम न्यायालय के आदेश से ही संभव है। यह अर्थ है कि केवल नोटरीकृत दस्तावेज या निजी समझौता विवाह समाप्त नहीं करता। तलाक एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें पति और पत्नी दोनों की मंजूरी और एक न्यायालय के आदेश की आवश्यकता होती है।

6 जुलाई 2026 को 08:52 am बजे
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बताया खत्म हो जाता है नोटरी तलाक का सारा, जाने तलाक क्या है और तलाक कैसे होता है?

सौजन्य से:- Navbharat Times

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नोटरीकृत तलाकनामा की क्या है कहानी और पृष्ठभूमि

मामला मध्यप्रदेश के ही रहने वाले एक व्यक्ति राम कृपाल सिंह से जुड़ा था जिनका कहना था कि उनकी पत्नी, स्वर्गीय सुमन देवी, आदिवासी और कल्याण विभाग में चौकीदार के पद पर स्थायी कर्मचारी थीं। नौकरी के दौरान 2022 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके बार-बार कोशिश करने के बावजूद उनकी पत्नी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन और अन्य लाभों का भुगतान नहीं किया गया। मामले में स्वयं को मृत महिला सरकारी कर्मचारी का दूसरा पति बताते हुए फैमिली पेंशन और टर्मिनल बेनिफिट्स की मांग की थी। उनका दावा था कि महिला ने अपने पहले पति से नोटरीकृत तलाकनामा के माध्यम से तलाक ले लिया था।नो वन किल्ड केतन ? सिया के इंकार से उलझे केस को सुलझाने की राह में कानून के सामने बड़ी चुनौती

हाईकोर्ट में मामला और फैसला

- हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय कानून में विवाह का विधिक विच्छेद केवल सक्षम न्यायालय के आदेश से ही संभव है। केवल नोटरीकृत दस्तावेज या निजी समझौता विवाह समाप्त नहीं करता।

- अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा जारी विधिक उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र का हवाला दिया। इस प्रमाणपत्र में मृत कर्मचारी के पहले पति और बच्चों को ही कानूनी उत्तराधिकारी बताया गया था। याचिकाकर्ता का नाम उसमें शामिल नहीं था।

- अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई न्यायिक आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि महिला का पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त हुआ था। इसलिए बाद में कथित विवाह को भी कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

- खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि याचिकाकर्ता और मृत महिला कर्मचारी लिव-इन संबंध में थे, तब भी इससे स्वतः वैवाहिक अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाते।

- विशेष रूप से पेंशन, उत्तराधिकार और सेवा लाभ जैसे मामलों में वैध विवाह का प्रमाण अत्यंत आवश्यक होता है। अदालत ने कहा कि अवैध या अप्रमाणित संबंधों के आधार पर सरकारी लाभ नहीं दिए जा सकते।

तलाक लेने की प्रक्रिया, तलाक कैसे होता है ?

परिवारों में तलाक एक संवेदनशील प्रक्रिया है। भारत में कानूनी रूप से तलाक चाहने वालों को सबसे पहले पारिवारिक न्यायालय में याचिका दायर करनी होती है। तलाक दो तरीकों से लिया जाता है..1. आपसी सहमति (Mutual Consent) से तलाक

इसमें पति और पत्नी दोनों स्वेच्छा से अलग होना चाहते हैं। इसमें शादी कम से कम एक वर्ष पूरी कर चुकी हो और दोनों पक्ष कम से कम एक साल से अलग-अलग रह रहे हों। इसमें तलाक लेने की प्रक्रिया है कि दोनों पक्षों के वकील मिलकर फैमिली कोर्ट में एक संयुक्त याचिका दायर करते हैं। कोर्ट में दोनों के बयान दर्ज होते हैं। इसके बाद कोर्ट 6 से 18 महीने का समय (कूलिंग-ऑफ पीरियड) देती है, ताकि वे सुलह कर सकें। इस अवधि के बाद, अंतिम सुनवाई में फिर से बयान दर्ज होते हैं और कोर्ट तलाक की डिक्री (Decree) जारी कर देती है।2. एकतरफा Contested Divorce तलाक

इसमें जब पति या पत्नी में से कोई एक पक्ष तलाक के लिए राजी न हो या दोनों के बीच गंभीर विवाद हो। इसमें शारीरिक या मानसिक क्रूरता, व्यभिचार, धर्म परिवर्तन, या पति या पत्नी के बिना किसी ठोस कारण के दो साल से अधिक समय तक छोड़ देने जैसे पुख्ता कारण साबित करने होते हैं। जो पक्ष तलाक चाहता है, वह अपने वकील के माध्यम से अदालत में याचिका दायर करता है। दोनों के बीच काउंसलिंग की जाती है। सुलह न होने पर साक्ष्य, गवाह और Cross-examination यानी जिरह के बाद अंत में, अदालत तलाक की डिक्री (Decree) जारी कर देती है।हिंदू शादी में रजिस्ट्रेशन कराया तो भी शादी अवैध,लेकिन क्यों, जानिए गुजरात हाईकोर्ट का फैसला

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