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सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में याचिकाकर्ता से कहा, पहले पुलिस से संपर्क करें और सिस्टम पर भरोसा रखें

सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित तौर पर एक इन्फ्लुएंसर की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

6 जुलाई 2026 को 03:58 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में याचिकाकर्ता से कहा, पहले पुलिस से संपर्क करें और सिस्टम पर भरोसा रखें

सौजन्य से:- Jansatta

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित तौर पर एक इन्फ्लुएंसर की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे पहले पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें और सिस्टम पर भरोसा रखें।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच ने एओआर अंसार अहमद चौधरी की ओर से दायय जनहित याचिका को तुरंत लिस्ट करने से इनकार कर दिया। वकील रजत कुमार ने बेंच के सामने यह मामला उठाया और कहा कि इन टिप्पणियों से सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है।

नाजिया खान ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर नाजिया इलाही खान ने जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मुहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं, जिनके क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। इस घटना के बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं।

याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रक्रिया और स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के चलन पर सवाल उठाते हुए जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, “क्या आपने मामला दर्ज कराया है? पुलिस मौजूद है। हमारे सिस्टम पर भरोसा रखें। हम तो सिर्फ शीर्ष निकाय हैं, निगरानी के लिए हैं। हमारे लिए भी यह देखना जरूरी है कि हमारे निचले स्तर के अधिकारी अपना काम कर रहे हैं या नहीं? अगर यहां सब कुछ गड़बड़ा गया, तो वे भी कहेंगे कि ठीक है, यही हो रहा है। सभी संस्थाएं बेकाबू हो रही हैं क्योंकि सब कुछ ऊपर से ही आता है।”

ऐसी बातों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए- जज

जज ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी बातों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए और कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है, मैं आपसे सहमत हूं। मैं खुद इस मामले को लेकर बहुत संवेदनशील हूं। लेकिन एक प्रक्रिया है। अगर उससे बात नहीं बनती, तो हमारे पास आइए। संवेदनशील मामलों में, आप सबसे पहले भारत के नागरिक हैं, आपको इसके परिणामों को समझना चाहिए। आप एक वकील हैं। आप कानून जानते हैं, आप इसके परिणामों को समझते हैं। इन मामलों को सनसनीखेज न बनाएं। अगर किसी ने गलती की है, तो उसे कानून की पूरी ताकत से सजा दिलवाएं।”

इस PIL में भारत सरकार के गृह विभाग, यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और नाजिया इलाही खान को पक्षकार बनाया गया है। यह याचिका डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट के पब्लिकेशन, सर्कुलेशन और प्रसार को रोकने, रेगुलेट करने और उन पर लगाम लगाने के लिए गाइडलाइंस बनाने और लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें: ‘ये अर्जियां विचार करने योग्य नहीं’, दिल्ली कोर्ट से उमर खालिद और शरजील इमाम को झटका, खारिज हुई जमानत याचिका

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत की नई अर्जियों को खारिज कर दिया। एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के उस आदेश से बंधी है जिसमें खालिद और इमाम की जमानत अर्जियां खारिज कर दी गई थीं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…

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