बिना इंश्योरेंस के वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, हाईवे कैमरे से कटेगा ऑटोमैटिक चालान
सुप्रीम कोर्ट ने बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर सख्ती करते हुए पेट्रोल न देने का सुझाव दिया है। हाईवे कैमरों से ऑटोमैटिक ई-चालान कटेगा। नई कार के लिए 4 और बाइक के लिए 6 साल का बीमा अनिवार्य।

सौजन्य से:- Hindustan
सावधान! इन सब गाड़ियों का अपने आप कटेगा चालान, सुप्रीम कोर्ट का आया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर सख्ती करते हुए पेट्रोल न देने का सुझाव दिया है। हाईवे कैमरों से ऑटोमैटिक ई-चालान कटेगा। नई कार के लिए 4 और बाइक के लिए 6 साल का बीमा अनिवार्य।
भारत की सड़कों पर दौड़ने वाले आधे से ज्यादा वाहनों का बीमा नहीं है। इस चौंकाने वाले आंकड़े पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों से निपटने के लिए कई कड़े सुझाव भी दिए हैं। अगर आपके वाहन का बीमा नहीं है, तो भविष्य में पेट्रोल पंप पर आपको पेट्रोल-डीजल मिलने में भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, हाईवे के कैमरों की मदद से ऐसे वाहनों की पहचान कर उनका ऑटोमैटिक चालान काटने के भी निर्देश दिए गए हैं।
16.5 करोड़ वाहन बिना इंश्योरेंस के
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 फीसदी वाहनों (जिनमें ज्यादातर दोपहिया वाहन हैं) का बीमा ही नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 30.4 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से 16.5 करोड़ बिना इंश्योरेंस के हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाले 22% सड़क हादसों में बिना बीमा वाले वाहन ही शामिल होते हैं। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य ही खत्म हो रहा है, जिससे दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर होना पड़ता है।
पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक इरडा और सड़क परिवहन मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करने का सुझाव दिया है। इसके तहत वाहनों को दिए जाने वाले ईंधन को उनके 'वैध बीमा स्टेटस' से जोड़ा जाएगा। यानी, जब तक वाहन का वैध बीमा नहीं होगा, उसे पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से मना किया जा सकेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस पर सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति जता दी है। कोर्ट के अनुसार, इससे न सिर्फ बिना बीमा वाले वाहनों की आसानी से पहचान हो सकेगी, बल्कि लोग मजबूरी में ही सही अपना इंश्योरेंस अपडेट रखेंगे।
कैमरों से कटेगा ऑटोमैटिक ई-चालान
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन कानून को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हाईवे और सड़कों पर लगे ANPR कैमरों को 'इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो' और 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इसके जरिए बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उनका ऑटोमैटिक ई-चालान जनरेट किया जा सकेगा। ANPR कैमरे फिलहाल ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग या रॉन्ग साइड ड्राइविंग पकड़ने के लिए लगे हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या डाउनलोड करने योग्य मोबाइल ऐप दिए जाएं ताकि वे मौके पर ही गाड़ियों का बीमा स्टेटस चेक कर सकें।
क्या है सजा और जुर्माने का प्रावधान?
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाने या चलवाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
- पहली बार पकड़े जाने पर- 3 महीने तक की जेल या 2,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों।
- दूसरी बार पकड़े जाने पर- 3 महीने तक की जेल या 4,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।
नए वाहनों के लिए इंश्योरेंस का नियम बदला
इससे पहले साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय कारों के लिए 3 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा। लेकिन, बड़ी संख्या में वाहनों के अभी भी बिना बीमा के दौड़ने के मद्देनजर, पीठ ने अब इस अवधि को एक साल और बढ़ा दिया है। कोर्ट के नए निर्देश के अनुसार, अब ग्राहकों को नई कारों के लिए 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य रूप से खरीदना होगा।
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