सुप्रीम कोर्ट ने किया नसीहत, हाई कोर्ट को अपनी धुरंधरी छोड़कर अधीनस्थ अदालतों का मार्गदर्शन करें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपीलीय अदालतों का रवैया अधीनस्थ न्यायालयों के प्रति 'फ्रेंड, फिलॉसफर एंड गाइड' जैसा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें एक ट्रायल जज को दोबारा ट्रेनिंग पर भेजने का निर्देश दिया गया था।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट की हाई कोर्ट को नसीहत, 'फ्रेंड, फिलॉसफर एंड गाइड' बनें, अधीनस्थ अदालतों पर धौंस न जमाएं
Edited by: दीपांशु|नवभारत टाइम्स•
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें एक ट्रायल जज को दोबारा ट्रेनिंग पर भेजने का निर्देश दिया गया था।
ऐसा होना चाहिए अपीलीय अदालतों का रवैया
अदालत ने कहा कि अपीलीय अदालतों का रवैया अधीनस्थ न्यायालयों के प्रति 'फ्रेंड, फिलॉसफर एंड गाइड' जैसा होना चाहिए। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणियां अनावश्यक थीं और न्यायिक अधिकारियों के संबंध में प्रतिकूल टिप्पणी करने के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं।सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया केरल हाई कोर्ट का फैसला
मामला एक परिवार में वसीयत की वैधता से जुड़े विवाद का था। ट्रायल कोर्ट ने वसीयत को विधिवत साबित नहीं माना और संपत्ति के बंटवारे की प्रारंभिक डिक्री पारित कर दी। बाद में केरल हाई कोर्ट ने यह फैसला पलट दिया। साथ ही टिप्पणी की कि ट्रायल जज मामले को समझने में विफल रहे और उन्हें केरल ज्यूडिशियल अकादमी में प्रशिक्षण के लिए भेजने का निर्देश दिया।केरल हाई कोर्ट ने नहीं किया साक्ष्यों का विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते समय साक्ष्यों का स्वतंत्र विश्लेषण नहीं किया। यह भी नहीं बताया कि ट्रायल कोर्ट से आखिर गलती कहां हुई। अदालत ने कहा कि प्रथम अपीलीय अदालत तथ्यों पर अंतिम अदालत होती है।कन्वर्सेशन शुरू करें
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