तीसरा जज भी, भीमा कोरेगांव केस की सुनवाई से अलग हुआ, क्यों?
सुप्रीम कोर्ट के तीसरे जज ने भीमा कोरेगांव मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इससे पहले दो अन्य जजों ने भी इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

सौजन्य से:- Hindustan
कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के जज, भीमा कोरेगांव केस की सुनवाई से क्यों खुद को अलग किया?
न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ऐसे तीसरे जज हैं जिन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इससे पहले, जज एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था।
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रशेखर ने 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को मंगलवार को अलग कर लिया। गाडलिंग की याचिका न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई थी। पीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए आने पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि यह किसी दूसरी पीठ के समक्ष जाएगा, मेरे साथी जज को कुछ दिक्कत है।
न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ऐसे तीसरे जज हैं जिन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इससे पहले, जज एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था।
पिछले हफ्ते गाडलिंग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया था और याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। सिब्बल ने कहा था कि गाडलिंग साढ़े सात साल से जेल में हैं। उन्होंने मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था।
कॉलेजियम की अक्सर बिना सोचे-समझे आलोचना होती है : CJI
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को कभी-कभी ‘बहुत ही सतही आलोचना’ का सामना करना पड़ता है, खासकर उन लोगों से जो वास्तव में न्यायिक प्रणाली के कामकाज के बारे में नहीं जानते हैं। सीजेआई ने कहा कि कोई भी निर्णय लेते समय, कॉलेजियम कई महत्वपूर्ण और प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखता है, खासकर जब संवैधानिक अदालतों में नियुक्ति के लिए जजों को शॉर्ट-लिस्ट किया जाता है।
सीजेआई सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस वी. मोहना के सम्मान में आयोजित किया गया था, जिन्होंने पिछले महीने शीर्ष अदालत के जज के रूप में शपथ ली थी।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब कॉलेजियम शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए नामों की सिफारिश करता है, तो प्रदर्शन, जज के रूप में पहले की गई सेवा अवधि, अतीत में संभाले गए पद और यहां तक कि उनके पेशेवर जीवन सहित विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
और पढ़ें
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के प्रीमियम FAR योजना पर सरकार को नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफ़ा‑उपार्जन संस्था नहीं चलाने की चेतावनी
- रॉडाली बारुआ: 2026 एशियन गेम्स टैक्वांदो टीम में तुरंत प्रवेश के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से अपील
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को कोर्ट दस्तावेज़ ऑनलाइन साझा करने से रोक दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई आपराधिक दंड नहीं
- पैत्रिक व स्व-अर्जित संपत्ति में पिता के अधिकार: एक बेटे को सब दे पाना क्या वैध?
- झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: बिहार का शराबबंदी कानून यहाँ नहीं लागू, जब्त पिक‑अप वैन को शर्तों के साथ रिहा
- पैतृक बनाम स्व-अर्जित: पिता की सम्पत्ति विभाजन पर सुप्रीम कोर्ट की 2026 तक की दिशा‑निर्देश

