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सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार: पैकेज्ड फूड पर वार्निंग लेबल क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर वार्निंग लेबल को लेकर केंद्र सरकार और FSSAI को फटकार लगाई और कहा कि भारत को अल्पविकसित देश बने रहना चाहिए क्या? अदालत ने केंद्र से विशेषज्ञों से परामर्श करने और एफओपीएल के स्वरूप को लेकर निर्णय लेने को कहा।

15 अगस्त 2026 को 05:56 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार: पैकेज्ड फूड पर वार्निंग लेबल क्यों नहीं?

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने पहले से पैक खाद्य पदार्थों (पैकेज्ड फूड) पर पोषण संबंधी चेतावनी लेबल (FOPL) लागू करने को लेकर केंद्र सरकार और FSSAI को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पहले से पैक खाद्य उत्पादों पर पैकेज के सामने की तरफ पोषण संबंधी जानकारी देने वाले लेबल (एफओपीएल) के स्वरूप को लेकर केंद्र को निर्णय लेने का निर्देश देते हुए सवाल किया कि क्या भारत को अल्पविकसित देश बने रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार के इस रुख से सहमत नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेषकर विकसित देशों के मानकों के अनुरूप चलना संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने किया अनुरोध

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पैक किया हुए खाद्य पदार्थों पर एफओपीएल अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पीठ ने कहा कि जागरूकता पैदा करने के लिए एफओपीएल जरूरी है, खासकर बढ़ते बच्चों के बीच जो ‘जंक फूड’ के तेजी से आदी हो रहे हैं।

SC ने एफएसएसएआई को लगाई फटकार

पीठ ने पैक किये हुए खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल शुरू करने में देरी को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को फटकार लगाई और कहा कि मोटापे को भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती के रूप में मान्यता दी गई है। जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने कहा कि पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना मुश्किल होने के कारण एफओपीएल को लेकर अदालत के सुझाव पर विचार करना संभव नहीं है, तो जस्टिस पारदीवाला ने सवाल किया कि क्या आप अदालत को हल्के में ले रहे हैं?

विदेशी व्यवस्थाओं का किया जिक्र

चिली, इजराइल और कनाडा समेत कई देशों में अपनाई जाने वाली व्यवस्थाओं और नियमों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि हम केंद्र के उस रुख को स्वीकार नहीं करते, जिसमें वह कहता है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर विकसित देशों के मानकों के अनुरूप चलना संभव नहीं है। क्या भारत को अल्पविकसित देश बने रहना चाहिए? यही सवाल हम केंद्र के विचारार्थ रख रहे हैं।

विशेषज्ञों सलाह लेने को कहा

पीठ ने कहा कि दुनिया को यह पता होना चाहिए कि भारत अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर। उसने केंद्र से विशेषज्ञों से परामर्श करने और एफओपीएल के स्वरूप को लेकर निर्णय लेने को कहा। पीठ ने कहा कि यदि केंद्र स्वयं ऐसा करता है, तो बहुत अच्छा है। अन्यथा हम आगे के निर्देश जारी करने की कार्यवाही करेंगे।अदालत ने सरकार को अंतिम निर्णय दो सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का समय दिया।

क्या है एफओपीएल

मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की गई है। फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पैकेजिंग पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी का एक ग्राफिक स्वरूप है, जो उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदने और स्वस्थ आहार का विकल्प चुनने के बारे में सुविचारित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।

लेखक के बारे मेंदीपांशुदीपांशु वर्तमान में 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में कंसल्टेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन और आईआईएमसी (IIMC) दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। मीडिया इंडस्ट्री में एक साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपांशु ने अपने करियर की शुरुआत साल 2025 में 'NDTV इंडिया' से की थी।उन्हें डिजिटल न्यूज रूम की तेज रफ्तार और ब्रेकिंग न्यूज कल्चर की अच्छी समझ है। दीपांशु की मुख्य रुचि राजनीति और क्राइम खबरों में है। वह बिहार चुनाव 2025, बजट 2026 और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर कर चुके हैं। इसके अलावा वह यूटिलिटी, लोकल, जंगल न्यूज और गुड न्यूज जैसी खबरों पर भी लगातार काम करते हैं।सोशल मीडिया और गूगल ट्रेंड्स पर उनकी खास नजर रहती है। वह इंटरनेट पर वायरल हो रहे मुद्दों और पाठकों की पसंद को समझकर खबरों को बहुत सरल, सटीक और असरदार तरीके से पेश करते हैं।... और पढ़ें

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