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सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया: न्याय का अधिकार सभी के लिए समान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय पाने का अधिकार हर नागरिक को समान रूप से प्राप्त होना चाहिए और पूर्व न्यायिक अधिकारी राकेश कुमार नैन की याचिका को सुनने से इनकार कर दिया। अदालत ने नैन को अपने मामले की तेज़ सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से संपर्क करने की सलाह दी, जबकि अन्य मामलों में भी समानता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

1 अक्टूबर 2026 को 01:06 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया: न्याय का अधिकार सभी के लिए समान

सौजन्य से:- Hindustan

न्याय पाने का सभी को समान अधिकार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय पाने का अधिकार सभी को समान रूप से है। पूर्व न्यायिक अधिकारी राकेश कुमार नैन की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए, अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति को न्याय की समानता प्राप्त है। नैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्याय पाने का अधिकार सभी को समान रूप से है। शीर्ष अदालत ने एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता व पूर्व न्यायिक अधिकारी राकेश कुमार नैन के वकील से कहा कि कोई व्यक्ति चाहे बस कंडक्टर हो या राज्य का सचिव, न्याय पाने का अधिकार सभी को समान रूप से है। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने नौकरी से हटाए जाने के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है जो वहां लंबित है। पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में ही कहा याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाकर जल्द सुनवाई के लिए अनुरोध करना चाहिए。

पूर्व न्यायिक अधिकारी की शिकायत

इससे पहले, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने शीर्ष अदालत से कहा कि हाईकोर्ट में मुकदमे का भारी बोझ होने के कारण उनकी याचिका पर फैसला नहीं हो पा रहा है। पीठ ने हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता की याचिका को प्राथमिकता देने के लिए कहना उन अन्य लोगों के साथ अन्याय होगा जो अपनी याचिकाओं पर फैसले के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि संवैधानिक समानता के इस दायरे में, हम व्यक्तिगत आधार पर कोई दखल नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट से जल्द सुनवाई का आग्रह कर सकता है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

न्यायिक कदाचार की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता राकेश कुमार नैन को भ्रष्टाचार के आरोपों में न्यायिक कदाचार का दोषी पाए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अभी सुनवाई होनी बाकी है। याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश के जिला अदालत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष जज के तौर पर तैनात थे。

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