सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया, जंगल की आग पर लगातार निगरानी की जरूरत
बहुत सारे जंगली आग लगने के निर्देश जारी करने के बारे में उच्च न्यायालय ने दस साल पहले कई दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन उन्हें अपनाने का कोई भी सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।

सौजन्य से:- ETV Bharat
'जंगल की आग पर लगातार निगरानी की जरूरत', सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का आदेश रद्द किया
उत्तराखंड सरकार के वकील ने कहा कि वे जंगल में आग लगने की घटनाओं के लिए उपग्रह तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.
By Sumit Saxena
Published : July 23, 2026 at 8:14 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2016 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जंगल की आग को नियंत्रित करने और रोकने समेत कई निर्देश दिए गए थे. शीर्ष अदालत ने मामले को विचार के लिए वापस भेज दिया.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा, "जैसा कि देखा जा सकता है, उच्च न्यायालय ने एक दशक से भी पहले कई निर्देश जारी किए थे. उन निर्देशों को लागू करने का असर नहीं दिख सका, क्योंकि इस कोर्ट ने 2017 में फैसले पर रोक लगा दी थी…"
पीठ ने कहा कि इनमें से अधिकांश निर्देशों का उत्तराखंड राज्य और भारत संघ ने काफी हद तक पालन किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जंगल में आग लगने की घटनाएं कमोबेश हर साल होती रहती हैं. पीठ ने कहा, "चूंकि फंड के गलत इस्तेमाल, कुप्रबंधन या गलत इस्तेमाल और अधिकारियों की तरफ से प्रतिबद्धता की कमी के आरोप हैं, इसलिए हमें लगता है कि हाई कोर्ट के दिए गए निर्देशों पर, जिन पर इस कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) ने रोक लगा दी थी.... हाई कोर्ट को फिर से विचार करना चाहिए, खासकर तब जब एक दशक बीत चुका है और जमीनी स्तर पर साफ तौर पर बदलाव दिख रहे हैं."
पीठ ने कहा कि बाद की घटनाओं और जंगल की आग को नियंत्रित करने वाली प्रणाली के आधुनिकीकरण और टेक्नोलॉजी की तरक्की को देखते हुए, यह बहुत बहस का मुद्दा बन जाता है कि क्या अधिकारियों को उच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक और ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत होगी. राज्य के वकील ने कहा कि वे जंगल में आग लगने की घटनाओं के लिए उपग्रह तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.
पीठ ने कहा कि जंगल की आग से जुड़े मामलों पर अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय को "लगातार निगरानी" करने की जरूरत है, जो इससे निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है.
शीर्ष अदालत ने कहा, "इसी तरह, यह एक ऐसा मामला है, जहां हम वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता से अनुरोध करते हैं कि वे न्याय-मित्र के तौर पर हाई कोर्ट की मदद करें. बेहतर होगा, ऑनलाइन पेशी के जरिये…"
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को उच्च न्यायालय को भेज दिया ताकि वह उठे सवालों पर फिर से विचार कर सके और बदले हुए हालात में जरूरत के हिसाब से संशोधित निर्देश जारी कर सके.
पीठ ने उच्च न्यायालय से कुछ उचित समय के लिए उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करने को कहा. पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने मार्च 2017 में उच्च न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी.
उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश हुए जतिंदर कुमार सेठी ने पीठ को बताया कि हाल के वर्षों में जंगल में आग लगने की घटनाओं में कमी आई है, क्योंकि ऐसी घटनाओं को रोकने और नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.
पीठ ने कहा कि जंगल की आग से निपटने के लिए एक मजबूत तंत्र बनाना होगा. पीठ ने कहा, "जंगल में आग लगना भी एक प्राकृतिक चीज है... इसके लगने के कई कारण हैं. कभी इंसानों की वजह से, कभी जंगल माफिया की वजह से."
पीठ ने यह आदेश दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की अपील भी शामिल थी. पीठ दत्ता की ओर दायर किए गए एक आवेदन पर भी विचार कर रही थी, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड में जंगल की आग से जुड़े मुद्दे उठाए थे.
दिसंबर 2016 में उच्च न्यायालय ने जंगल, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और वन्यजीवों को बचाने के लिए कई निर्देश दिए थे. इसने केंद्र सरकार को वन प्रबंधन, संरक्षण और टिकाऊ विकास के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय वन नीति तैयार करने का निर्देश दिया ताकि वन आवरण को बनाए रखा जा सके और बढ़ाया जा सके.
यह भी पढ़ें- सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के प्रीमियम FAR योजना पर सरकार को नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफ़ा‑उपार्जन संस्था नहीं चलाने की चेतावनी
- रॉडाली बारुआ: 2026 एशियन गेम्स टैक्वांदो टीम में तुरंत प्रवेश के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से अपील
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को कोर्ट दस्तावेज़ ऑनलाइन साझा करने से रोक दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई आपराधिक दंड नहीं
- पैत्रिक व स्व-अर्जित संपत्ति में पिता के अधिकार: एक बेटे को सब दे पाना क्या वैध?
- झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: बिहार का शराबबंदी कानून यहाँ नहीं लागू, जब्त पिक‑अप वैन को शर्तों के साथ रिहा
- पैतृक बनाम स्व-अर्जित: पिता की सम्पत्ति विभाजन पर सुप्रीम कोर्ट की 2026 तक की दिशा‑निर्देश

