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निष्पक्षता पर जोर: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में केंद्र को दो-टूक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में निष्पक्षता दिखनी चाहिए. कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

30 जुलाई 2026 को 02:34 pm बजे
निष्पक्षता पर जोर: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में केंद्र को दो-टूक

सौजन्य से:- ETV Bharat

'इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति में निष्पक्षता दिखनी चाहिए': सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को दो टूक

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

By Sumit Saxena

Published : July 30, 2026 at 7:27 PM IST

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति में निष्पक्षता दिखनी चाहिए. कहा, "जैसे न्याय सिर्फ़ किया जाना नहीं है, बल्कि उसे होते हुए दिखाना भी है." सुप्रीम कोर्ट ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति में केंद्र की दबदबे वाली भूमिका पर विचार-विमर्श किया. इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने की.

चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे ECs को नियुक्त करने वाले मौजूदा पैनल में प्रधानमंत्री, LoP और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं. बेंच चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नर (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ़ सर्विस एंड टर्म ऑफ ऑफिस) एक्ट, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति के लिए सिलेक्शन पैनल से चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) को बाहर रखता है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के ऑफिस की पवित्रता जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा, "अगर उनके फैसले पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इसे जरूरी तौर पर एक गलत नीयत वाली एक्सरसाइज माना जाना चाहिए, तो ऐसा प्रोविजन क्यों नहीं है कि अपनी कैबिनेट चुनते समय भी उन्हें किसी पुराने जज या बाहरी व्यक्ति से सलाह लेनी चाहिए?" यह भी कहा गया कि एग्जीक्यूटिव और लेजिस्लेचर राज्य के दूसरे अंगों के उलट, सीधे लोगों के प्रति जवाबदेह हैं.

जस्टिस दत्ता ने कहा, "कितने राज्यों में ऐसे मंत्री हैं जिनके पास केस हैं…जैसा कि आपने कहा कि जज जजों को चुनते हैं, हमें हैरानी होती है कि आजकल जज जजों को चुनते हैं…हमें हैरानी होती है. हम आपकी बातों से यह समझ रहे हैं." जस्टिस दत्ता ने आगे कहा, "हम प्रधानमंत्री पर भरोसा क्यों नहीं करेंगे, बेशक हम प्रधानमंत्री पर भरोसा करेंगे लेकिन इतने सालों में ऐसा नहीं हुआ है. मैं यहीं रुकता हूं."

जस्टिस दत्ता ने आगे कहा कि PM इस बात का ध्यान रखेंगे कि कोई भी ग्रे एलिमेंट वाला मंत्री न बने और कहा, "हम इसे PM की समझ पर छोड़ते हैं. हम किसी मंत्री की नियुक्ति के मामले से नहीं निपट रहे हैं…हमें लगता है कि मंत्री पहले से ही वहां हैं." जस्टिस दत्ता ने कहा, "अब, PM को अपने कैबिनेट मेंबर में से एक को चुनना है. यह 2:1 हो जाता है, दो कैबिनेट की तरफ और एक विपक्ष की तरफ."

मेहता ने कहा कि इस कमेटी में मिनिस्टर चुनना PM की पसंद नहीं है और वह होम मिनिस्टर या एनिमल हसबैंड्री मिनिस्टर, या किसी और मिनिस्टर को अपॉइंट कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "जिस पल आप 2:1 कहते हैं, आप ज़रूर भरोसे की कमी दिखा रहे हैं." जस्टिस दत्ता ने साफ किया कि यह भरोसे की कमी नहीं है और इलेक्शन कमिश्नर (EC) को एक इंडिपेंडेंट व्यक्ति होना चाहिए और उसे कौन चुन रहा है?

जस्टिस दत्ता ने कहा कि एक कमेटी EC को चुन रही है और पूछा कि क्या फेयरनेस नहीं दिखानी चाहिए? "हम यह नहीं कह रहे हैं कि इस कमेटी द्वारा फेयरनेस नहीं हो रही है. जैसे न्याय सिर्फ़ किया ही नहीं जाता, बल्कि उसे होते हुए दिखाना भी होता है. जस्टिस दत्ता ने कहा, "हम उस दूसरे हिस्से पर हैं." मेहता ने बार-बार बेंच से कहा कि पहले बड़ी बेंच को रेफर करने के सवाल पर फैसला किया जाए. बेंच ने इशारा किया कि कोर्ट यह फैसला लेने से पहले मेरिट पर दलीलें सुनना चाहता है.

बेंच ने पूछा कि क्या कोई संवैधानिक रुकावट है जो दो जजों की बेंच को इस पर फैसला करने से रोकती है? मेहता ने कहा कि यह रुकावट नहीं डालती. जस्टिस दत्ता ने कहा, "यह हम पर छोड़ दें कि यह पांच जजों की बेंच के सामने जाएगा या हम दोनों के सामने." जस्टिस दत्ता ने मौखिक रूप से कहा कि अगर हर जरूरी संवैधानिक सवाल को शुरू में ही रेफर करना होता, तो आर्टिकल 32 के तहत फाइल की गई सभी पिटीशन को संवैधानिक बेंच को सुनना पड़ता.

सबमिट सुनने के बाद, बेंच ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और डिप्टी की नियुक्ति प्रक्रियाओं को रेगुलेट करने वाले कानून को चुनौती देने वाली पिटीशन को पांच जजों की बड़ी बेंच को रेफर करने की जरूरत है. बेंच ने पिटीशनर और केंद्र से इस बारे में लिखित सबमिशन फाइल करने को कहा. बेंच ने कहा, "हम रेफरेंस पर फैसला सुरक्षित रख रहे हैं. आप अपनी लिखित दलीलें दे सकते हैं."

याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन, संजय पारीख, विजय हंसारिया, शादान फरासत और वकील प्रशांत भूषण ने पैरवी की. उन्होंने रेफरेंस की जरूरत का विरोध किया.

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