सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में देवांगना कालिता को दस्तावेज निरीक्षण की अनुमति संबंधी रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है, जिसमें देवांगना कालिता को उन दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी जिनका अभियोजन पक्ष ने इस्तेमाल नहीं किया था. उच्चतम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
दिल्ली दंगे : देवांगना कालिता को दस्तावेज निरीक्षण की अनुमति संबंधी हाई कोर्ट के फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने देवांगना कलिता को बिना आधार वाले दस्तावेजों को देखने की इजाजत देने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई.
Published : July 20, 2026 at 3:11 PM IST
|Updated : July 20, 2026 at 5:33 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी देवांगना कालिता को उन दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी थी जिनका अभियोजन पक्ष ने इस्तेमाल नहीं किया था.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल एम पंचोली की बेंच ने की. बेंच ने दिल्ली पुलिस की उस अर्जी पर कलिता को नोटिस जारी किया, जिसमें 5 जून के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. बेंच ने कहा, "आप 10 साल में भी अपनी दलीलें पूरी नहीं करेंगे और फिर आप कहते हैं कि ट्रायल में देरी हो रही है."
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी कि जब तक आरोप तय नहीं हो जाते, कलिता किसी भी दस्तावेज की हकदार नहीं हैं. राजू ने पूछा, "इस स्टेज पर जांच का क्या मकसद है."
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए, कलिता के वकील ने कहा कि आरोप तय होने से पहले उन दस्तावेजों की सूची भी दी जानी चाहिए जिन पर भरोसा नहीं किया गया है. दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने कलिता से जवाब मांगा और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. बेंच ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है.
हाई कोर्ट ने इस साल जून में 2020 के दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोप तय करने पर लगी अपनी पिछली रोक हटा ली थी और ट्रायल कोर्ट को आखिरी आदेश पास करने की इजाजत दी थी.
हाई कोर्ट ने कलिता की याचिका खारिज करते हुए अपना आदेश रद्द कर दिया जिसमें पुलिस को मामले से संबंधित कुछ वीडियो और व्हाट्सएप चैट उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी. हालांकि, अदालत ने कलिता द्वारा एक अलग याचिका की अनुमति दी और उसे यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) मामले में अविश्वसनीय दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी.
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