माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी कर्नाटक-केरल-तेलंगाना सरकार - kerala karnataka and telangana government challenge mines and minerals act in supreme court
माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी कर्नाटक-केरल-तेलंगाना सरकार कांग्रेस शासित केरल, कर्नाटक और तेलंगाना सरकारें मानसून सत्र में पारित माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में…

सौजन्य से:- Jagran
माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी कर्नाटक-केरल-तेलंगाना सरकार
कांग्रेस शासित केरल, कर्नाटक और तेलंगाना सरकारें मानसून सत्र में पारित माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी।
HighLights
- केरल, कर्नाटक, तेलंगाना सरकारें कानून को चुनौती देंगी।
- संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
- झारखंड सरकार से भी याचिका में शामिल होने की बात।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पारित माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन कानून 2026 को कांग्रेस शासित तीन राज्यों केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
इस कानून को संघीय ढांचे के खिलाफ राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण तथा राजस्व कम करने वाला बताते हुए सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी।
नए संशोधित कानून का विरोध कर रही झारखंड सरकार से भी कांग्रेस इसके खिलाफ दायर की जाने वाली याचिका में भागीदार बनने के लिए बातचीत कर रही है।
केरल, कर्नाटक तथा तेलंगाना सरकार देंगे चुनौती
कांग्रेस सूत्रों ने पार्टी शासित तीन राज्यों केरल, कर्नाटक तथा तेलंगाना की ओर से जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में माइंस एंड मिनरल्स संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिका दायर किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका मसौदा तैयार कर लिया गया है। इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी बातचीत पूरी कर ली है।
मालूम हो कि मानसून सत्र के दौरान हंगामे के बीच बिना पर्याप्त चर्चा के पारित हुए विधेयक में राज्यों के खनन अधिकारों और खनिज संपदा वाली जमीनों पर टैक्स लगाने की राज्यों की शक्तियों को सीमित करने का प्रविधान है।
कांग्रेस तथा विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया था लेकिन हंगामे के बीच दोनों सदनों ने इसे पारित कर दिया था।
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार तथा तेलंगाना के सीएम रेवंत रेडडी ने भी विधेयक पारित किए जाने को राज्यों के राजस्व तथा अधिकार को छीनने का प्रयास बताते हुए इसका विरोध किया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा था कि राज्य के लेवी (टैक्स) पर प्रतिबंध से राज्य की वित्तीय गुंजाइश काफी कम हो सकती है।
साथ ही माइनिंग से जुड़ी सामाजिक और पर्यावरणीय लागतों से निपटने की झारखंड की क्षमता पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस मुद्दे पर झारखंड सरकार का रूख भी हमारे जैसा ही है और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिका में संयुक्त भागीदार बनाने के लिए हेमंत सोरेन से चर्चा चल रही है।
कांग्रेस का मानना है कि न्यायिक परीक्षण की कसौटी पर यह कानून कमजोर पड़ेगा क्योंकि यह 2024 के सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले के प्रतिकूल है।
यह भी पढ़ें- भ्रूण लिंग निर्धारण से जुड़े मामलों में सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती पुलिस, PCPNDT Act पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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