पलामू डीएमओ पर 50 हजार का जुर्माना: कोर्ट ने माना कि डीएमओ को कानून की जानकारी नहीं है
झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) पर बिना कानूनी प्रक्रिया के ट्रक जब्त करने के लिए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने टिप्पणी की कि डीएमओ को कानून की जानकारी नहीं है, इसलिए वह पद के काबिल नहीं हैं।

सौजन्य से:- Jagran
पलामू डीएमओ पद के काबिल नहीं, नहीं जानते कानून; झारखंड हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू के जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) पर बिना कानूनी प्रक्रिया के ट्रक जब्त करने के लिए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने ...और पढ़ें
HighLights
- हाई कोर्ट ने पलामू डीएमओ पर 50 हजार का जुर्माना लगाया।
- बिना कानूनी प्रक्रिया ट्रक जब्त करने पर हुई यह कार्रवाई।
- अदालत ने डीएमओ को पद के अयोग्य बताया, कानून नहीं जानते।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में स्टोन चिप्स के परिवहन में लगे ट्रक को बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जब्त करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने पलामू के जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पलामू डीएमओ के वेतन से वसूल कर एक सप्ताह के भीतर प्रार्थी को दी जाए। अदालत ने छतरपुर थाना प्रभारी को प्रार्थी का ट्रक तत्काल छोड़ने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा डीएमओ को कानून की जानकारी नहीं है, इसलिए वह पद के काबिल नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में अग्रेतर कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव और खनन सचिव को आदेश की प्रति भेजने का भी निर्देश दिया है।
अदालत के आदेश के आलोक में सुनवाई के दौरान पलामू के जिला खनन पदाधिकारी, छतरपुर के सीओ और छतरपुर थाना प्रभारी अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि ट्रक जब्त किए जाने के संबंध में कोई प्राथमिकी या मामला दर्ज किया गया है या नहीं।
डीएमओ ने बताया कि खनन कानून का पालन नहीं किए जाने की वजह से ट्रक को रोक गया है और खनन निदेशक से इस मामले में कार्रवाई के संबंध में मंतव्य मांगा गया है। जब्ती सूची भी भेजी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि बिना प्राथमिकी के ट्रक को कैसे रोका जा सकता है, जबकि प्रार्थी की ने सभी दस्तावेज भी दिया है।
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कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कार्रवाई गलत मंशा से की गई है या संबंधित अधिकारियों को कानून और निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। इस संबंध में मेसर्स सिंह मर्चेंट की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने कहा कि छतरपुर पुलिस ने बिना किसी कारण 20 जून को प्रार्थी का ट्रक पकड़ लिया था। प्रार्थी को न तो जब्ती सूची दी गई और न ही ट्रक रोके जाने का उचित कारण बताया गया।
उन्होंने स्टोन चिप्स के परिवहन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज भी दिखाए हैं, लेकिन अभी तक ट्रक को नहीं छोड़ गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ट्रक को जब्त करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उक्त राशि डीएमओ पलामू के वेतन से वसूल का निर्देश दिया है।
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