ओम बिरला ने कहा, वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाएगा
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने घोषणा की है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच रिपोर्ट मानसून सत्र में पेश की जाएगी। जस्टिस वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और उनके खिलाफ जांच का प्रस्ताव लाया गया है।

सौजन्य से:- Jagran
जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट मानसून सत्र में की जाएगी पेश, बोले ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने घोषणा की है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच रिपोर्ट मानसून सत्र में पेश की जाएगी, जिससे उनके इस्तीफे के बावजू ...और पढ़ें
HighLights
- जस्टिस वर्मा भ्रष्टाचार जांच रिपोर्ट मानसून सत्र में होगी पेश।
- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस अरविंद कुमार की समिति ने सौंपी रिपोर्ट।
- इस्तीफे के बावजूद हटाने का प्रस्ताव लाने की संभावना।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली तीन-सदस्यीय समिति की रिपोर्ट 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में लोकसभा में पेश की जाएगी। इससे उनके इस्तीफे के फैसले के बावजूद संसद में उन्हें हटाने का प्रस्ताव लाए जाने की संभावना बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल के विधायकों को संबोधित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बिरला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा उन्हें सौंपी गई रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला सदन ही करेगा।
सत्र के पहले दिन ही पेश की जा सकती है रिपोर्ट
यह रिपोर्ट सत्र के पहले दिन पेश की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों ही तरफ की पार्टियों के सदस्यों ने वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।
जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर पक्की राय नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं। उनका नाम इस्तीफे के बावजूद कोर्ट के पोर्टल पर अभी भी मौजूदा जजों की सूची में है। पिछले साल मार्च में आग लगने की घटना के बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स अधिकारियों को नई दिल्ली स्थित उनके बंगले के एक आउटहाउस में नष्ट किए गए नोटों के ढेर मिले थे।
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जब इस राय के बारे में पूछा गया कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लाया गया यह प्रस्ताव वर्मा के इस्तीफे के बाद बेअसर हो गया है तो सूत्रों ने कहा कि यह कानूनी तौर पर एक अस्पष्ट स्थिति है और इस पर कोई पक्की राय नहीं है।
सूत्रों ने कहा, "असल बात यह है कि हाई कोर्ट अभी भी उन्हें अपने मौजूदा जजों की लिस्ट में शामिल मानता है।" सूत्र ने यह भी बताया कि इस्तीफा देने के बावजूद जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पूरी करने का काम जारी रखा और अपनी रिपोर्ट बिरला को सौंप दी।
146 से ज्यादा लोगों ने किए थे हस्ताक्षर
जब यह मामला सामने आया तब वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी थी। बाद में उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था। उनके खिलाफ नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले 146 से ज्यादा लोगों में अलग-अलग पार्टियों के लोकसभा सांसद शामिल थे, जिनमें कांग्रेस के राहुल गांधी और बीजेपी के रवि शंकर प्रसाद और अनुराग सिंह ठाकुर भी थे।
तत्कालीन चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना द्वारा बनाई गई इन-हाउस जांच समिति और बाद में बिरला द्वारा बनाई गई समिति के सामने दिए गए बयानों में वर्मा ने खुद को बेगुनाह बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उनके घर पर इतनी बड़ी मात्रा में बिना हिसाब-किताब वाला पैसा कैसे मिला। उन्होंने इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा था।
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