IAS-IPS में बदलाव से मचेगी अफरा-तफरी, केंद्र ने OBC आरक्षण में क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट में दी बड़ी दलील
ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर के एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ के सामने कुछ अहम दलीलें रखी हैं। नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अन्य पिछड़ा वर…

सौजन्य से:- Navbharat Times
ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर के एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ के सामने कुछ अहम दलीलें रखी हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 'क्रीमी लेयर' के नियम तय करने के लिए दो साल का समय मांगा है। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की बेंच से 11 मार्च के उस फैसले को पिछली तारीख से लागू करने के खिलाफ अपनी अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग की है। इस फैसले में PSU या प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी के आधार पर OBC उम्मीदवारों के वर्गीकरण (क्रीमी लेयर) को खारिज कर दिया गया था।
SG मेहता ने CJI सूर्यकांत की पीठ से की अपील
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच से रोहित नाथन मामले में 11 मार्च के फैसले पर कुछ स्पष्टीकरण मांगने वाली अर्जी को लिस्ट करने का अनुरोध किया। वकील वरुण ठाकुर ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कानून तय कर चुका है।
केंद्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा या उसमें बदलाव नहीं चाहता, बल्कि कोर्ट को पिछली तारीख से इसे लागू करने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों के बारे में बताना चाहता है।
SG तुषार मेहता
OBC उम्मीदवारों के पुराने बैच का स्टेटस बदलना होगा: SG
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, SG तुषार मेहता ने कहा कि इसके लिए 'क्रीमी लेयर' OBC उम्मीदवारों के पुराने बैच का स्टेटस बदलकर 'नॉन-क्रीमी' करना होगा और सिविल सर्विस में उनके कैडर, पद और सर्विस में बदलाव करना होगा। इससे IFS, IAS और IPS जैसे कैडर और सर्विस में लंबे समय से काम कर रहे उतने ही उम्मीदवारों के लिए भी इसी तरह के बदलाव करने होंगे, जिससे अफरातफरी मच जाएगी।
IFS, IAS और IPS जैसे कैडर और सर्विस में लंबे समय से काम कर रहे उतने ही उम्मीदवारों के लिए भी इसी तरह के बदलाव करने होंगे, जिससे अफरातफरी मच जाएगी।
SG तुषार मेहता
1 सितंबर को अर्जियों को लिस्ट करने पर सहमत सुप्रीम कोर्ट
तुषार मेहता ने कहा कि वह सिर्फ जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच के सामने जल्द सुनवाई के लिए अर्जी लिस्ट करने का अनुरोध कर रहे हैं। CJI ने 1 सितंबर को अर्जियों को लिस्ट करने पर सहमति जताई।
अपनी अर्जी में केंद्र ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में आने वाली गंभीर चुनौतियों और नतीजों को देखते हुए सरकार एक ऐसी पॉलिसी लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर प्रभावी ढंग से अमल करे और साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि पॉलिसी का सीधा और परोक्ष असर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हो।'
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में आने वाली गंभीर चुनौतियों और नतीजों को देखते हुए सरकार एक ऐसी पॉलिसी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
SG तुषार मेहता
केंद्र ने कहा-बिना उचित पॉलिसी के दूरगामी असर पड़ेगा
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने कहा कि अगर बिना किसी उचित पॉलिसी के 11 मार्च के फैसले को लागू किया जाता है, तो केंद्र और 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा की जाने वाली सरकारी भर्तियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिलों पर इसका दूरगामी असर पड़ेगा।
सरकार ने कहा कि रेलवे, बैंक, डाक विभाग और पैरामिलिट्री जैसे बड़े संगठनों और नियोक्ताओं के पास 'क्रीमी लेयर' के पुराने समय से लागू होने वाले नए वर्गीकरण की मांग करने वाली लाखों अर्जियां और कानूनी मामले आ सकते हैं।
क्या है क्रीमीलेयर का मामला
1992 के इंदिरा साहनी फैसले के बाद सरकार ने 8 सितंबर 1993 को एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें OBC क्रीमी लेयर की पहचान करने के नियम बताए गए थे, जिन्हें आरक्षण के फायदों से बाहर रखा जाना था।
11 मार्च के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि क्रीमी लेयर का दर्जा तय करने का आधार 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम में बताए गए काम-धंधे की कैटेगरी होनी चाहिए। साथ ही, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले माता-पिता की आय के आधार पर अपने आप यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आता है।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें
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