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IAS रोहिणी सिंदूरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नोटिस, अब हाई कोर्ट का आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक कैडर की IAS अधिकारी रोहिणी सिंदूरी की याचिका पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों को नोटिस जारी कर दिया है। यह मामला इको-फ्रेंडली कपड़े के बैग की खरीद से जुड़े कथित घोटाले को लेकर है, जिस पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईएएस रोहिणी सिंदूरी के खिलाफ जांच की मंजूरी देने का निर्देश दिया था।

1 अगस्त 2026 को 10:15 am बजे
IAS रोहिणी सिंदूरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नोटिस, अब हाई कोर्ट का आदेश?

सौजन्य से:- Navbharat Times

IAS Rohini Sindhuri: कर्नाटक कैडर की जानी-मानी आईएएस ऑफिसर रोहिणी सिंदूरी इन दिनों कपड़े के बैग की खरीद की वजह से अदालतों के चक्कर काट रही हैं। अब वह कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक कैडर की IAS अधिकारी रोहिणी सिंदूरी की याचिका पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों को नोटिस जारी कर दिया। यह मामला इको-फ्रेंडली कपड़े के बैग की खरीद से जुड़े कथित घोटाले को लेकर था, जिस पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईएएस रोहिणी सिंदूरी के खिलाफ जांच की मंजूरी देने का निर्देश दिया था।

IAS रोहिणी सिंदूरी ने अपनी याचिका में क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को आईएएस सिंदूरी की इस याचिका में कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य को 'इको-फ्रेंडली कपड़े के बैग की खरीद' से जुड़े कथित घोटाले में अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' की धारा 17A के तहत मंजूरी देने का निर्देश दिया गया था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कर्नाटक सरकार और शिकायतकर्ता दोनों को नोटिस जारी कर दिया।

राज्य सरकार ने धारा 17A के तहत मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि अनुशासनात्मक जांच में उनकी कोई गलती नहीं पाई गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने एक ऐसा निर्देश जारी किया जो असल में मंजूरी देने जैसा ही था।

IAS रोहिणी सिंदूरी अपनी याचिका में

कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बता दी ये बात

खास बात यह है कि कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे भी हाई कोर्ट के आदेश का विरोध कर रहे हैं। IAS रोहिणी सिंदूरी की ओर से सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' की धारा 17A के तहत मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि अनुशासनात्मक जांच में उनकी कोई गलती नहीं पाई गई थी।

हालांकि, हाई कोर्ट ने एक ऐसा निर्देश जारी किया जो असल में मंजूरी देने जैसा ही था। इस पर, राज्य के वकील ने कहा कि वे हाई कोर्ट के आदेश को भी चुनौती दे रहे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या करेगा

अब नोटिस जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि क्या कर्नाटक हाई कोर्ट का राज्य सरकार को शुरुआती जांच की मंजूरी देने का आदेश सही था? वहीं, सरकार ने विभागीय नतीजों के आधार पर पहले ही इससे इनकार कर दिया था।

यह मामला 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत मंज़ूरी से जुड़े फैसलों की न्यायिक समीक्षा के दायरे और विभागीय जांच व आपराधिक जांच के बीच संबंध को लेकर अहम सवाल उठाता है।

हाई कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को दिया 4 हफ्ते का अल्टीमेटम

हाई कोर्ट के जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने 1 अप्रैल को दिए गए फैसले में राज्य को निर्देश दिया कि वह चार हफ्ते के भीतर शुरुआती जांच को मंजूरी दे।

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य आरोपी अधिकारी को 'आपराधिक जांच की शुरुआती पड़ताल' से बचाने के लिए विभागीय तौर पर बरी किए जाने का इस्तेमाल नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने यह फैसला रविचंद्र गौड़ा की दायर एक रिट याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

13 रुपये का बैग 53 रुपये में खरीदने का आरोप

31 जुलाई, 2026 मैसूरु की डिप्टी कमिश्नर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान IAS अधिकारी रोहिणी सिंदूरी पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने 52 रुपये प्रति बैग की दर से कपड़े के बैग खरीदे, जबकि वैसी ही क्वालिटी के बैग रिटेल मार्केट में आसानी से 13 रुपये में मिल रहे थे।

शिकायतकर्ता के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर के इस संदिग्ध फैसले से सरकारी खजाने को लगभग 7.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। IAS अधिकारी ने इससे पहले 2021 में शहर की कमिश्नर रहते हुए प्लास्टिक बैग पर रोक लगाने और मैसूरु के निवासियों को पर्यावरण के अनुकूल कपड़े के बैग बांटने का फ़ैसला किया था।

IAS सिंदूरी की याचिका में क्या कहा गया था

याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट के आदेश से 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत जरूरी कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया। इस धारा के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपने आधिकारिक काम के दौरान लिए गए फैसलों की जांच करने से पहले मंजूरी लेना जारी है।

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें

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