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जाति प्रमाणपत्र आवेदन खारिज करने के लिए ठोस कारण बताना अनिवार्य: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जाति प्रमाणपत्र आवेदन को बिना ठोस और लिखित कारण बताए खारिज करना संविधान सम्मत नहीं है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश प्रसारित करने के लिए कहा है और आवेदकों को आपत्ति दर्ज करने का अवसर देने का भी निर्देश दिया है।

30 जुलाई 2026 को 02:34 pm बजे
जाति प्रमाणपत्र आवेदन खारिज करने के लिए ठोस कारण बताना अनिवार्य: इलाहाबाद हाई कोर्ट

सौजन्य से:- Jagran

‘बिना कारण बताए जाति प्रमाणपत्र आवेदन खारिज करना संविधान सम्मत नहीं’, इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जाति प्रमाणपत्र आवेदन बिना ठोस कारण बताए खारिज करना असंवैधानिक है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश प्रसारित करने और तीन मह ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट ने कहा- प्रशासनिक आदेश भी बिना कारण वैध नहीं माने जा सकते

- कोर्ट ने मुख्य सचिव को दिया निर्देश, मथुरा के भाई-बहन ने दायर की थी याचिका

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी व्यक्ति के जाति प्रमाणपत्र आवेदन को बिना ठोस और लिखित कारण बताए खारिज करना संविधान सम्मत नहीं है। स्वीकृति या अस्वीकृति का विस्तृत कारण सहित आदेश पारित हो, जो सात दिनों के अंदर आवेदक को उपलब्ध कराया जाए।

मथुरा निवासी की याचिका पर कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि वह उसके आदेश सभी जिलों और तहसील स्तर तक भिजवाने के साथ ही तीन महीने में इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने पर विचार करें। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह आदेश मथुरा निवासी आलोक ढांगर और उनकी बहन की याचिका पर दिया है।

याची का जाति प्रमाणपत्र वेबसाइट पर खारिज हुआ

याची की तरफ से अधिवक्ता विवेक कुमार पाल ने बहस की। बताया कि याची भाई-बहन ने अनुसूचित जाति 'ढांगर' श्रेणी में जाति प्रमाणपत्र के लिए तहसीलदार के समक्ष आवेदन किया था। सभी जरूरी दस्तावेज आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर, ग्राम प्रधान का पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र आदि जमा करने के बावजूद 23 फरवरी 2026 को उनका आवेदन केवल 'साक्ष्य अभाव' लिखकर विभागीय वेबसाइट पर खारिज कर दिया गया। कोई विस्तृत कारण दिया गया न कोई रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। आदेश भी याचियों को नहीं भेजा।

केवल वेबसाइट पर सूचना डाल देना पर्याप्त नहीं

कोर्ट ने कहा- केवल वेबसाइट पर सूचना डाल देना पर्याप्त सूचना देना नहीं है, बिना कारण निरस्त ऐसे आदेश को तर्कसंगत नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक आदेश भी बिना कारण के वैध नहीं हो सकते। आवेदक को यह जानने का वैधानिक अधिकार है कि उसका दावा क्यों खारिज हुआ? जब तक कोई आदेश संबंधित व्यक्ति को सूचित न किया जाए, वह प्रभावी नहीं माना जाता।

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आवेदक को आपत्ति का अवसर दिया जाए

कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवेदक को रिपोर्ट पर आपत्ति और कमी दूर करने का अवसर दिया जाए। स्वीकृति या अस्वीकृति का विस्तृत कारण सहित आदेश पारित हो, जो सात दिन में आवेदक को उपलब्ध कराया जाए। वेबसाइट पर रिपोर्ट और आदेश दोनों डाउनलोड करने योग्य लिंक के रूप में उपलब्ध हों। पूरी प्रक्रिया आवेदन की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी की जाए।

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