सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता HC को TMC के बोर्ड हटाने के मामले में शीघ्र फैसला देने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर अपने कार्यालय से हटाए गए साइनबोर्ड को चुनौती देने वाली याचिका पर त्वरित निर्णय लेने को कहा। अदालत ने बताया कि बिना नोटिस के बोर्ड हटाना मामला निरर्थक नहीं है और यदि हटाना अवैध पाया गया तो बोर्ड की पुनर्स्थापना का आदेश भी जारी किया जा सकता है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
बिना नोटिस हटाया अभिषेक बनर्जी का बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता HC से कहा- 'तेजी से करें फैसला'
पीठ ने TMC की याचिका का निपटारा कर दिया और हाई कोर्ट से सभी पक्षों की दलीलों पर तेजी से फैसला करने का अनुरोध किया.
By Sumit Saxena
Published : September 7, 2026 at 2:28 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका पर तेजी से फैसला करने को कहा है, जिसमें कोलकाता नगर निगम द्वारा पार्टी के कोलकाता कार्यालय से होर्डिंग्स हटाए जाने को चुनौती दी गई है. इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की.
पीठ टीएमसी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर पार्टी कार्यालय के ऊपर से एक बिलबोर्ड को कथित रूप से अवैध तरीके से हटाए जाने के मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करने के खिलाफ थी. पीठ ने टीएमसी से कहा कि वह कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित अपने कार्यालय से पार्टी का साइनबोर्ड हटाए जाने से जुड़ी सभी दलीलें हाई कोर्ट के सामने रखे.
पीठ ने TMC द्वारा दायर याचिका का निपटारा कर दिया और हाई कोर्ट से सभी पक्षों की दलीलों पर तेजी से फैसला करने का अनुरोध किया. पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका की विचारणीयता पर शुरुआती आपत्ति जताई. टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पीठ के समक्ष पेश हुए.
कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च अदालत से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय परिसर में पार्टी के होर्डिंग को हटाए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया. सिब्बल ने दलील दी कि बिना किसी नोटिस के बोर्ड को हटा दिया गया. उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि ग्राउंड फ्लोर पर लगा हल्दीराम का बोर्ड वैसे का वैसा ही है, उसे छुआ तक नहीं गया. पीठ ने इस मामले पर आगे विचार करने से इनकार कर दिया. कहा कि यह मामला अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है.
सिब्बल ने इस बात पर जोर दिया कि हाई कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका था कि कार्रवाई का कोई ठोस कारण नहीं बचा है. इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि सिर्फ बोर्ड हटा दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि यह मामला निष्प्रभावी या निरर्थक हो गया है. जस्टिस बागची ने इस बात पर जोर दिया कि अगर यह पाया जाता है कि बोर्ड को गलत तरीके से हटाया गया था, तो उसे दोबारा लगाने के लिए एक अनिवार्य आदेश जारी किया जा सकता है.
सिब्बल ने दलील दी कि अगर इसे बिना किसी नोटिस के हटाया गया था, तो हाई कोर्ट को तुरंत दखल देना चाहिए था. उन्होंने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने कहा है कि चूंकि बोर्ड हटा दिया गया है, इसलिए अब कार्रवाई का कोई कारण नहीं है और कुछ नहीं किया जा सकता. पीठ ने कहा कि वह हाई कोर्ट से इस मामले पर एक समय सीमा के भीतर फैसला करने का अनुरोध कर सकती है, और यह स्पष्ट करेगी कि अंतरिम आदेश में दी गई टिप्पणियां केवल अस्थायी थीं.
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