गाजियाबाद दुष्कर्म केस: बयानों में विरोधाभास, आरोपित को अदालत ने किया बरी - ghaziabad court acquits accused in rapepocso case
गाजियाबाद दुष्कर्म केस: बयानों में विरोधाभास, आरोपित को अदालत ने किया बरी गाजियाबाद की विशेष अदालत ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोपी रोबिन को बरी कर दिया। पीड़िता और उसकी मां के बयानों में विरोधाभास व साक्ष्यों की कमी…

सौजन्य से:- Jagran
गाजियाबाद दुष्कर्म केस: बयानों में विरोधाभास, आरोपित को अदालत ने किया बरी
गाजियाबाद की विशेष अदालत ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोपी रोबिन को बरी कर दिया। पीड़िता और उसकी मां के बयानों में विरोधाभास व साक्ष्यों की कमी के च ...और पढ़ें
HighLights
आरोपी रोबिन को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से बरी किया गया।
पीड़िता और मां के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास मिले।
साक्ष्य की कमी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट नहीं पाई गई।
हसीन शाह, गाजियाबाद। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नीरज गौतम की अदालत ने आरोपित रोबिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसकी मां और जांच से जुड़े साक्ष्यों में कई विरोधाभास सामने आए। जिससे पीड़ित पक्ष की कहानी कमजोर पड़ गई।
कवि नगर थाना क्षेत्र में 23 दिसंबर 2020 को पीड़िता ट्यूशन पढ़ने गई थी। आरोप था कि रोबिन उसे जबरन हथियार के बल पर अपने साथ बजरिया स्थित होटल ले गया। वहां उसके साथ गन प्वाइंट पर दुष्कर्म किया। पुलिस में आरोपित युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
अदालत ने कहा कि पीड़िता की उम्र को लेकर भी स्पष्ट साक्ष्य नहीं हैं। स्कूल के कागजों और गवाहों के बयानों के आधार पर घटना के समय पीड़िता के बालिग होने की संभावना सामने आई। ऐसे में पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग होने का आरोप भी साबित नहीं हो सका।
ऐसे कमजोर पड़ा पीड़ित पक्ष
पीड़िता और उसकी मां के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास मिले। मां ने बेटी के सहेली के साथ ट्यूशन जाने की बात कही, जबकि पीड़िता ने सहेली को जानने से ही इन्कार कर दिया। एफआइआर में ट्यूशन जाने का समय और अदालत में दिए गए बयान मेल नहीं खाए। ट्यूशन शिक्षक और वहां मौजूद अन्य छात्रों को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया।
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जांच में रह गईं ये बड़ी खामियां
पीड़िता ने पिस्टल दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया, लेकिन कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। विवेचक ने भी स्वीकार किया कि हथियार बरामद करने के लिए विशेष प्रयास नहीं किए गए। होटल के विजिटर रजिस्टर और बुकिंग रिकॉर्ड को प्रभावी साक्ष्य के रूप में साबित नहीं किया गया। कथित घटना से जुड़े स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी अदालत में पेश नहीं किए गए। भीड़भाड़ वाले रास्तों और सार्वजनिक स्थानों के बावजूद कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला।
आरोपित को मिला संदेह का लाभ
मेडिकल रिपोर्ट में कोई बाहरी या आंतरिक चोट नहीं मिली। फोरेंसिक जांच में भी निर्णायक साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने माना कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सकी, इसलिए आरोपित को बरी किया गया।
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