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लाठीचार्ज को लेकर कानून क्या कहता हaid, जानें क्या कहते हैं कानूनी श्रोतों

भारत में लाठीचार्ज को लेकर कानून के पास सीधा जवाब नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पुलिस उचित और सीमित बल का इस्तेमाल कर सकती है. इसके लिए भीड़ को गैरकानूनी जमावड़ा माना जाना चाहिए और पहले चेतावनी दी जानी चाहिए, अगर भीड़ हटती नहीं तभी पुलिस बल प्रयोग पर विचार कर सकती है.

23 जुलाई 2026 को 12:14 pm बजे
लाठीचार्ज को लेकर कानून क्या कहता हaid,  जानें क्या कहते हैं कानूनी श्रोतों

सौजन्य से:- ndtv.in

- लाठीचार्ज शब्द का भारतीय कानून में जिक्र नहीं है. पर जरूरत पड़ने पर पुलिस बल प्रयोग कर सकती है.

- इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों पर सीमित पुलिस बल के प्रयोग की अनुमति है.

- कुछ राज्यों के पुलिस मैनुअल में लाठीचार्ज दर्ज है. पर इससे पहले चेतावनी, फिर न्यूनतम बल प्रयोग का जिक्र है.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुई पुलिस कार्रवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. दरअसल, 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाइयों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दो याचिका दायर की गई थी. इसी सिलसिले में हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है. अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी. इस मामले में अदालत ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया है. ऐसे में यह सवाल उठाता है कि आखिर भारत में लाठीचार्ज को लेकर कानून क्या कहता है?

तो बता दें कि इसका जवाब सीधा नहीं है क्योंकि भारतीय कानून में कहीं भी लाठीचार्ज शब्द का जिक्र नहीं है. लेकिन कानून कुछ खास परिस्थितियों में पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जरूरी और न्यूनतम बल इस्तेमाल करने की अनुमति देता है.

कानून की किताब में लाठीचार्ज को पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है. कानून सिर्फ इतना कहता है कि जरूरत पड़ने पर पुलिस उचित और सीमित बल का इस्तेमाल कर सकती है. यानी कानून बल प्रयोग की बात करता है, लाठीचार्ज की नहीं.

पुलिस कब बल प्रयोग कर सकती है?

पुलिस हर तरह के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं कर सकती. इसके लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी हैं. पुलिस तभी बल प्रयोग कर सकती है जब भीड़ को कानून के मुताबिक 'गैरकानूनी जमावड़ा' माना गया हो. सक्षम अधिकारी ने भीड़ को हटने का आदेश दिया हो. लोगों को पहले चेतावनी दी गई हो. चेतावनी के बावजूद भीड़ वहां से न हटे और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग जरूरी हो. यानी बिना चेतावनी या बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए सीधे बल प्रयोग करना कानून के खिलाफ माना गया है.

Delhi: Supreme Court lawyer Nanita Sharma says, "We have all gathered here to show solidarity with the students. We stand with them against the excesses they have been subjected to. The children were merely raising their voices against injustice and the education system... Those… pic.twitter.com/ENm03XSTEU

— IANS (@ians_india) July 23, 2026

गैरकानूनी जमावड़ा किसे कहा जाता है?

भारतीय कानून के मुताबिक, अगर 5 या उससे ज्यादा लोग किसी ऐसे मकसद से इकट्ठा हों जिससे सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल हो. कानून के पालन में बाधा डाली जाए. दंगा, हिंसा या गंभीर उपद्रव की आशंका हो. ऐसे मौजूदगी को गैरकानूनी जमावड़ा माना जा सकता है.

ऐसी स्थिति में इकट्ठा लोगों को प्रशासन हटाने का आदेश दे सकता है. कानून के मुताबिक आमतौर पर मजिस्ट्रेट या थाने का प्रभारी अधिकारी भीड़ को हटाने का आदेश दे सकते हैं. अगर आदेश के बाद भी लोग नहीं हटते, तभी पुलिस बल प्रयोग पर विचार कर सकती है.

VIDEO | Parliament Monsoon Session: Congress MP Shashi Tharoor says, "We have several issues that are burning up the nation, including this capital city. We've seen what happened yesterday. And in these circumstances, if Parliament is not the forum to discuss them, then what is… pic.twitter.com/GmgrmwEVPL

— Press Trust of India (@PTI_News) July 21, 2026

पुलिस बल इस्तेमाल पर हाई कोर्ट के आदेश

लाठीचार्ज की घटना से जुड़े कई मामले अदालतों में गए. भारतीय अदालतों ने कई फैसलों में साफ कहा है कि पुलिस केवल 'न्यूनतम और उचित बल' का ही इस्तेमाल कर सकती है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि बल प्रयोग से पहले तीन बातें जांचना जरूरी हैं. पहला, जमावड़ा गैरकानूनी हो. दूसरा, भीड़ को पहले हटने का आदेश देना होगा. और तीसरा, आदेश के बावजूद भीड़ न हटे. इन तीनों शर्तों के बगैर पुलिस बल का प्रयोग उचित नहीं माना जाएगा.

ऐसा ही दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक मामले में निर्देश दिया था. कोर्ट का कहना था कि पुलिस केवल उतना ही बल इस्तेमाल कर सकती है, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हो. अदालत ने यह भी याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है. इस मामले में जस्टिस एके सिकरी ने कहा था कि अगर पुलिस का उद्देश्य शांति बहाल करने के बजाय लोगों को सजा देना या डराना हो, तो ऐसा बल प्रयोग कानून के खिलाफ होगा.

Delhi: Senior advocate of supreme court Indira Jaising says, "I agree with what the previous speaker has said. We are here to stand with the students. We are here to stand on the side of justice. We are here to demand justice for the students. We are not here to agitate for… pic.twitter.com/ezpWOgb8WZ

— IANS (@ians_india) July 23, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बल के इस्तेमाल पर क्या कहा?

अनिता ठाकुर बनाम जम्मू-कश्मीर सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी हिंसक भी हो जाएं, तब भी पुलिस जरूरत से ज्यादा बल नहीं इस्तेमाल कर सकती. साथ ही यह भी कहा गया था कि एक बार स्थिति नियंत्रण में आ जाए तो पुलिस को बल प्रयोग तुरंत रोक देना चाहिए. अदालत ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग मानवाधिकार और मानव गरिमा का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत अपने अधिकारों का शांतिपूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर रहे नागरिकों के खिलाफ हिंसा करना असंवैधानिक है. देश का कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि भले ही कभी-कभी सीमित बल का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा.

यानी कानून कहीं भी यह नहीं बताता कि कितनी लाठी चल सकती है या कितनी ताकत इस्तेमाल की जा सकती है. लेकिन अदालतों ने बार-बार कहा है कि जितनी जरूरत हो, सिर्फ उतना ही बल इस्तेमाल किया जाए. लोगों को सजा देने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता और स्थिति सामान्य होते ही बल प्रयोग रोक देना चाहिए.

पुलिस मैनुअल क्या कहता है?

कुछ राज्यों के पुलिस मैनुअल में लाठीचार्ज के नियम भी दिए गए हैं. उदाहरण के लिए, केरल पुलिस मैनुअल कहता है कि पहले लोगों को पर्याप्त चेतावनी दी जाए. न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए. लाठी शरीर के मुलायम हिस्सों पर मारी जाए. सिर और गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों पर वार करने से बचा जाए.

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र के बेसिक प्रिंसिपल ऑन द यूज ऑफ फोर्स ऐंड फायरआर्म्स (1990) के मुताबिक. अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो पुलिस को बल प्रयोग से बचना चाहिए. अगर बल प्रयोग जरूरी हो, तो वह न्यूनतम होना चाहिए. जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल केवल बेहद गंभीर और अंतिम स्थिति में ही किया जा सकता है.

कुल मिलाकर भारत के कानून में 'लाठीचार्ज' शब्द नहीं लिखा है. हालांकि पुलिस को केवल जरूरी और सीमित बल इस्तेमाल करने की अनुमति है. लेकिन इससे पहले चेतावनी देना और भीड़ को हटने का मौका देना जरूरी है. यहां तक कि हिंसक प्रदर्शन भी हो, तो जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग अदालतों की नजर में गैरकानूनी हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों कई मामलों में कह चुके हैं कि पुलिस का उद्देश्य व्यवस्था बहाल करना होना चाहिए, लोगों को दंड देना नहीं.

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