दिल्ली में प्रदर्शन: जंतर‑मंतर से रामलीला मैदान तक की अनुमति और प्रतिबंध
प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आयोजकों को DCP के कार्यालय से कम से कम 10 दिन पहले लिखित NOC चाहिए, जिसमें पहचान, उद्देश्य, भीड़‑संख्या और मार्ग जैसी जानकारी देनी होती है। छोटे‑मोटे शांतिपूर्ण रैलियों को जंतर‑मंत्र पर 1,000 तक प्रतिभागियों के साथ दिन के 10 वजे से 5 वजे तक किया जा सकता है, जबकि बड़ी भीड़ वाले कार्यक्रमों को 50,000 क्षमता वाले रामलीला मैदान में होना चाहिए। रात में रुकना, तंबू लगाना, हथियार या लाउडस्पीकर का उपयोग, तथा संवेदनशील क्षेत्रों में बिना विशेष अनुमति के इकट्ठा होना सभी प्रतिबंधित हैं।

सौजन्य से:- ABP News
EXPLAINED: जंतर-मंतर, राम लीला मैदान समेत कहीं भी दिल्ली में प्रोटेस्ट करने के क्या हैं नियम, जानिए कानून
आयोजकों को संबंधित ज़िले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) के कार्यालय से पहले से लिखित अनुमति या अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है.
देश की राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करना एक तरफ जहां संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के मौलिक अधिकार की अभिव्यक्ति है, वहीं दूसरी तरफ अनुच्छेद 19(3) के तहत कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाई गई उचित पाबंदियों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया भी है.
दिल्ली पुलिस के विभिन्न स्टैंडिंग ऑर्डर, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों (रामलीला मैदान 2012, जंतर-मंतर 2018, शाहीन बाग 2020) और कानूनी संहिताओं के आधार पर राजधानी में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए क्या नियम है आइए समझते हैं
अनिवार्य लिखित अनुमति (NOC) और प्रक्रिया
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को बिना पूर्व अनुमति के कहीं भी इकट्ठा होने या जुलूस निकालने का कोई स्वतः अधिकार नहीं है. आयोजकों को संबंधित ज़िले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) के कार्यालय से पहले से लिखित अनुमति या अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है.
इसके लिए न्यूनतम 10 दिन पहले आवेदन पत्र जमा करना होता है, जिसमें आयोजक की पहचान, प्रदर्शन का उद्देश्य, अनुमानित भीड़, समय-सीमा, वक्ताओं की सूची और तय रास्ते का पूरा विवरण देना होता है.
निर्धारित स्थल एवं भीड़ क्षमता की सीमा
सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनों के स्थल तय किए हैं. छोटे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर पर अनुमति दी जाती है, जहां अधिकतम 1,000 प्रतिभागियों की सीमा तय की गई है.
1,000 से अधिक लोगों की भागीदारी वाले विशाल प्रदर्शनों या रैलियों के लिए केवल रामलीला मैदान जैसे बड़े स्थलों का रुख करने का निर्देश दिया जाता है, जिसकी क्षमता लगभग 50,000 लोगों की है.
सुप्रीम कोर्ट के शाहीन बाग फैसले (2020) के अनुसार, सार्वजनिक सड़कों, आम रास्तों या फ़्लाईओवर को अनिश्चित काल के लिए ब्लॉक करके प्रदर्शन करना पूरी तरह गैर-कानूनी है.
समय की पाबंदी और रात में रुकने की मनाही
जंतर-मंतर जैसे स्थलों पर प्रदर्शन केवल दिन के समय, आमतौर पर सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ही आयोजित किए जा सकते हैं. प्रदर्शन स्थल पर तंबू या टेंट लगाना, भोजन पकाना, अस्थायी ढांचे खड़ा करना या रात भर रुकना सख्त मना है, जब तक कि विशेष परिस्थिति में प्रशासन द्वारा इसकी लिखित मंज़ूरी न दी गई हो.
धारा 163 (BNSS) / पूर्ववर्ती धारा 144 (CrPC) के तहत निषेध
सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली पुलिस संवेदनशील क्षेत्रों जैसे लुटियंस दिल्ली, संसद भवन परिसर, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और राज्य की सीमाओं के आस-पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में CrPC की धारा 144) लागू रखती है.
इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना स्पष्ट और विशेष अनुमति के 5 या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना स्वतः "गैर-कानूनी जनसमूह" माना जाता है.
हथियार, ज्वलनशील सामग्री और लाउडस्पीकर पर कड़े नियम
प्रदर्शनकारियों के लिए लाठी, डंडे, तलवार, भाले, आग्नेयास्त्र या झंडे टांगने के लिए 2 फ़ीट से लंबे डंडे ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और अदालती आदेशों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर पुतला जलाने, कचरा फैलाने या भोजन पकाने पर रोक है.
लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम का उपयोग करने के लिए अलग से साउंड परमिशन लेनी होती है, जो तय डेसिबल सीमा और दिन के तय घंटों के भीतर ही मान्य होती है.
हाई-सिक्योरिटी विंडो के दौरान स्वचालित निलंबन
राजधानी की विशेष स्थिति को देखते हुए, कुछ खास मौकों पर केंद्रीय और संवेदनशील इलाकों में विरोध प्रदर्शन की मंज़ूरियां निलंबित कर दी जाती हैं या आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं जैसे संसद के सत्र संचालन के दौरान, स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की सुरक्षा तैयारियों के दौरान, किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे G20 आदि) के आयोजन के समय.
आयोजकों की जवाबदेही और लिखित अंडरटेकिंग
NOC प्राप्त करने से पहले आयोजकों को एक कानूनी अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर करना होता है, जिसमें वे प्रदर्शनकारियों के आचरण की पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं.
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act) के तहत, यदि प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा, तोड़फोड़ या आगज़नी होती है, तो इसके नुकसान की वित्तीय भरपाई आयोजकों और संबंधित संगठन/पार्टी से की जा सकती है, साथ ही आपराधिक कार्रवाई भी की जाती है.
पुलिस की निगरानी, अनुमति रद्द करना और बल-प्रयोग
गड़बड़ी फैलाने वाले तत्वों की पहचान और पारदर्शिता के लिए दिल्ली पुलिस पूरे प्रदर्शन स्थल और जुलूस की अनिवार्य रूप से वीडियो-ग्राफ़ी और ड्रोन निगरानी करती है. इंटेलिजेंस इनपुट, ट्रैफ़िक व्यवस्था में भारी रुकावट या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में पुलिस के पास किसी भी समय NOC रद्द करने का सर्वाधिकार सुरक्षित होता है.
यदि कोई सभा गैर-कानूनी घोषित कर दी जाती है, तो पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने या आनुपातिक बल प्रयोग करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है.
अनुमति खारिज होने पर कानूनी विकल्प
यदि पुलिस प्रशासन किसी प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करता है, तो वह निर्णय प्रशासनिक रूप से मनमाना नहीं हो सकता. आयोजकों के पास दो मुख्य कानूनी रास्ते होते हैं.
-पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (जैसे एडिशनल कमिश्नर या जॉइंट सीपी) के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करना.
-संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में रिट याचिका दायर कर प्रशासनिक आदेश को चुनौती देना.
हिरासत या गिरफ्तारी की स्थिति में मौलिक अधिकार
यदि प्रदर्शन के दौरान किसी नागरिक को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो भी उनके संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं.
व्यक्ति को तुरंत उसकी गिरफ्तारी या हिरासत का कारण जानने का अधिकार है. अपनी पसंद के कानूनी प्रतिनिधि (वकील) से बात करने और मुफ़्त कानूनी सहायता पाने का अधिकार. हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद अपने परिवार या मित्र को सूचित करने का अधिकार.
महिला प्रदर्शनकारियों को केवल महिला पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में ही हिरासत में लिया जा सकता है, और सूर्यास्त के बाद तथा सूर्योदय से पहले बिना न्यायिक मजिस्ट्रेट के विशेष आदेश के उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती.
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