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DUSIB भूमि से कब्जा हटाने का आदेश बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार - supreme court upholds delhi hc order on dusib land eviction

DUSIB भूमि से कब्जा हटाने का आदेश बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार दिल्ली हाई कोर्ट के डीयूएसआईबी भूमि से कब्जा हटाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है, जिससे कब्जाधारियों की कानू…

20 अगस्त 2026 को 04:55 pm बजे
DUSIB भूमि से कब्जा हटाने का आदेश बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार
 - supreme court upholds delhi hc order on dusib land eviction

सौजन्य से:- Jagran

DUSIB भूमि से कब्जा हटाने का आदेश बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट के डीयूएसआईबी भूमि से कब्जा हटाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है, जिससे कब्जाधारियों की कानूनी चुनौती समाप्त हो गई।

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने डीयूएसआइबी भूमि खाली करने का आदेश बरकरार रखा।

- दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार।

- कब्जाधारियों को अब आवंटित परिसर खाली करना होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट के दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की आवंटित भूमि से कब्जा हटाने के निर्देश का पालन अब निर्बाध रूप से हो सकेगा। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया। इस निर्णय के साथ ही उनके निरंतर कब्जे के खिलाफ कानूनी चुनौती खत्म हो गई है।

जस्टिस पामिदीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कवात्रा हास्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि वह "हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है"। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) को खारिज कर दिया।

यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय से सामने आया, जिसमें कब्जाधारियों को उनके लाइसेंस का अनिश्चितकालीन विस्तार देने से इन्कार कर दिया गया। चूंकि डीयूएसआइबी भूमि के लिए नई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि संविदात्मक व्यवस्था एक निश्चित अवधि के लिए थी और कब्जाधारी अधिकतम विस्तार के तहत समझौतों के अनुसार अनिश्चितकाल तक कब्जे का अधिकार नहीं मांग सकते।

हाई कोर्ट ने कब्जाधारियों को 10 अगस्त से एक अतिरिक्त सप्ताह दिया था ताकि वे पंडाल और अन्य संरचनाओं को तोड़कर परिसर खाली कर सकें। दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेशानुसार, हाई कोर्ट का दिया अतिरिक्त एक सप्ताह का समय 17 अगस्त को समाप्त हो गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इन्कार के बाद कब्जाधारियों के पास खाली करने के निर्देश के खिलाफ कोई और राहत नहीं है। भूमि का कब्जा वापस लेने का मुद्दा डीयूएसआइबी समेत अब कार्यकारी अधिकारियों के लिए कानून के अनुसार कार्य करने के लिए होगा।

हाई कोर्ट ने डीयूएसआइबी को 3 अगस्त, 2026 से छह सप्ताह के भीतर नए टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने का भी निर्देश दिया था। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कब्जाधारियों ने तर्क किया कि उनके समझौतों के अनुच्छेद 6 के तहत, वे नए नीलामी/टेंडर प्रक्रिया के पूरा होने तक कब्जे में रह सकते हैं।

पीठ ने कहा कि वे केवल इस आधार पर और विस्तार नहीं मांग सकते कि नई टेंडर प्रक्रिया अधूरी है। चूंकि कब्जाधारी पहले ही अधिकतम छह महीने का विस्तार ले चुके थे।

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