होमअपराधश्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में अदालत के फैसले का इंतजार, हिंदू पक्ष के वादों को मान्यता देने पर मुहर नहीं लग रही!
अपराध

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में अदालत के फैसले का इंतजार, हिंदू पक्ष के वादों को मान्यता देने पर मुहर नहीं लग रही!

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। अदालत में यह तय होना है कि हिंदू पक्ष की याचिकाओं में कौन-सी याचिका रिप्रजेंटेटिव वाद मानी जाए।

16 जुलाई 2026 को 02:12 am बजे
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में अदालत के फैसले का इंतजार, हिंदू पक्ष के वादों को मान्यता देने पर मुहर नहीं लग रही!

सौजन्य से:- Navbharat Times

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार की सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। अदालत में यह तय होना है कि हिंदू पक्ष की याचिकाओं में कौन-सी याचिका प्रतिनिधि वाद मानी जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले वाद संख्या 17 को प्रतिनिधि वाद माना था, जिसका अन्य पक्षकार विरोध कर रहे हैं।

नई दिल्ली: मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुख्य विवाद के साथ ही इस मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल तमाम याचिकाओं मे कौन सी याचिका रिप्रजेंटेटिव शूट बने, इस मुद्दे पर भी सुनवाई होनी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शूट नंबर 17 को रिप्रजेंटेटिव शूट माना था। हिन्दू पक्ष के दूसरे वादियों का कहना है कि उनके शूट अलग मुद्दे और दलीलों पर आधारित है, इसलिए केवल शूट संख्या 17 को रिप्रजेंटेटिव शूट नहीं माना जा सकता है।

श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा विवाद

यह विवाद श्री कृष्ण जन्मभूमि और उसके निकट स्थित शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद उस स्थान पर बनी है जो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण 17वीं सदी में औरंगजेब के शासनकाल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर किया गया था। उनका कहना है कि यह स्थल भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है।

क्या है मुस्लिम पक्ष का दावा

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है। इस विवाद में मंदिर की जमीन पर स्वामित्व, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं। मस्जिद पक्ष का कहना है कि 1968 के समझौते के तहत यह विवाद पहले ही सुलझ चुका है।

भड़काऊ बयानबाजी न करने की अपील

इसके पहले 5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सेक्रेटरी और वकील तनवीर अहमद ने लोगों से अपील की थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर भड़काऊ बयान देने से बचें। तनवीर अहमद ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर कई मामले कोर्ट में लंबित हैं। लंबित मामलों में भड़काऊ बयानबाजी उचित नहीं है, लोगों को कानून पर भरोसा रखना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि मस्जिद और मंदिर के रास्ते भी अलग हैं। मस्जिद में पांच वक्त नमाज होती है और मंदिर में भजन-पूजन। वैसे भी यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, कहीं किसी प्रकार का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि काफी लंबा समय बीत जाने के बाद अब आवाज उठाई जा रही है। ऐसे में जो मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं तो फैसले का इंतजार करना चाहिए।

लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।

विशेषज्ञता

उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।

पत्रकारिता अनुभव

रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।

शिक्षा/पुरस्कार

मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने खोली यौन उत्पीड़न पीड़िताओं की दर्दनाक सच्चाई, संवेदनशीलता की कमी, विक्टिम ब्लेमिंग का शिकार
अपराध

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने खोली यौन उत्पीड़न पीड़िताओं की दर्दनाक सच्चाई, संवेदनशीलता की कमी, विक्टिम ब्लेमिंग का शिकार

फर्जी वीजा रैकेट मामले में जमानत मिलती है, अदालत ने कहा- सिर्फ जांच लंबित है
अपराध

फर्जी वीजा रैकेट मामले में जमानत मिलती है, अदालत ने कहा- सिर्फ जांच लंबित है

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति

फ्रांस में इच्छामृत्यु के लिए हरी झंडी, नए कानून में गरिमा की शर्तें
अपराध

फ्रांस में इच्छामृत्यु के लिए हरी झंडी, नए कानून में गरिमा की शर्तें

दुष्कर्म पीड़िता का अदालत में नया बयान, नानक सेठ पर लगाए आरोप
अपराध

दुष्कर्म पीड़िता का अदालत में नया बयान, नानक सेठ पर लगाए आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने 1979 की हत्या के मामले में 3 लोगों को बरी किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने 1979 की हत्या के मामले में 3 लोगों को बरी किया

प्रकाशन कानून में संशोधन: डिजिटल प्रकाशन और अंतर्राष्ट्रीय एकीकरण का मार्ग प्रशस्त
अपराध

प्रकाशन कानून में संशोधन: डिजिटल प्रकाशन और अंतर्राष्ट्रीय एकीकरण का मार्ग प्रशस्त

सुप्रीम कोर्ट का क्या है ऐतिहासिक फैसला जिससे कराया अवगत
अपराध

सुप्रीम कोर्ट का क्या है ऐतिहासिक फैसला जिससे कराया अवगत

ताज़ा ख़बरें