सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: नोएडा डीएम मेधा रूपम की 5 लाख वेतन कटौती पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए नोएडा डीएम मेधा रूपम की वेतन से 5 लाख रुपये काटने की प्रक्रिया को निलंबित कर दी। हाई कोर्ट ने यह राशि छात्रा आकृति चौधरी को मुआवजा देने के लिए डीएम और अन्य अधिकारियों की वेतन से वसूली का आदेश दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस निर्णय में डीएम को अकेले उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। अगले चरण की सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित है।

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
Supreme Court On DM Medha Roopam: नोएडा डीएम मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा डीएम की सैलरी से 5 लाख रुपये काटने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा की डीएम मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा डीएम मेधा रूपम की सैलरी से 5 लाख रुपये काटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने उनकी सैलरी से यह राशि निकालकर छात्रा आकृति चौधरी को मुआवजा देने का आदेश दिया था। दरअसल, स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। छात्रा ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। इस मामले में हाई कोर्ट ने छात्र पर लगे एनएसए को रद्द करते हुए मुआवजे का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ नोएडा डीएम मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट चली गईं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
नोएडा डीएम मेधा रूपम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हिरासत का फैसला कई अधिकारियों की जांच और मंजूरी के बाद लिया गया था तो डीएम मेधा रूपम को अकेले इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। मामला अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़ा हुआ है। इस दौरान नोएडा में हिंसा को भड़काने के मामले में छात्रा आकृति चौधरी को हिरासत में लिया गया। उस पर एनएसए के तहत कारवाई की गई।
मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने छात्रा पर एनएसए लगाए जाने को गलत माना। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि छात्रा को एनएसए के तहत हिरासत का आदेश बिना ठीक से सोचे-समझे जारी किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने छात्रा आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द करने और मेधा रूपम की आलोचना करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर भी रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नोएडा की डीएम मेधा रूपम के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मेधा रूपम की याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
हाई कोर्ट का क्या था आदेश?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि छात्रा की एनएसए हिरासत राज्य सरकार की ओर से गढ़ी गई कहानी पर आधारित थी। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने कहा था कि 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया। यह राशि डीएम मेधा रूपम और थाना प्रभारी तक के जिम्मेदार अन्य अधिकारियों की सैलरी से वसूलने के निर्देश दिए गए। साथ ही आकृति चौधरी को रिहा करने का भी आदेश आया था।
हाई कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज से लेकर लखनऊ और नोएडा तक माहौल गरमाया। बाद में नोएडा की पहली डीएम और 2014 बैच की आईएएस अधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। नोएडा में आने से पहले मेधा रूपम बरेली, मेरठ, हापुड़ और कासगंज में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।
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राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा:
राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें
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