बच्चों के अधिकारों की देखरेख: थाने से अदालत तक एलएसयूसी की नई पहल
पूर्णिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने नालसा योजना 2024 के तहत एलएसयूसी सदस्यों को प्रशिक्षण दिया, जिसमें यह बताया गया कि पुलिस, किशोर न्याय बोर्ड या अदालत के सामने बच्चे को अकेला न छोड़ा जाए और समय पर कानूनी सहायता प्रदान की जाए। इसमें बाल देखरेख संस्थानों का मासिक निरीक्षण, पीड़ित बच्चों को मुआवजा दिलाने में मदद, और विभिन्न संस्थाओं में कानूनी सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारियाँ भी तय की गईं।

सौजन्य से:- Hindustan
थाने से अदालत तक बच्चों के अधिकारों की निगरानी करेगा एलएसयूसी
पूर्णिया, कार्यालय प्रतिनिधि। बच्चों को कानून की जटिलताओं से बचाते हुए उन्हें सहज, सुरक्षित और समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्र
पूर्णिया, कार्यालय प्रतिनिधि। बच्चों को कानून की जटिलताओं से बचाते हुए उन्हें सहज, सुरक्षित और समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार पूर्णिया ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में नालसा (बच्चों के लिए बाल हितैषी विधिक सेवाएं) योजना 2024 के तहत गठित बच्चों के लिए विधिक सेवा इकाई (एलएसयूसी) के सदस्यों के लिए बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी बच्चे का सामना पुलिस, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति या अदालत से होने पर उसे कानूनी सहायता के लिए अकेला न छोड़ा जाए। आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सुनील कुमार ने की। उन्होंने एलएसयूसी के सदस्यों, पैनल अधिवक्ताओं और पारा विधिक स्वयंसेवकों को बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करने तथा उन्हें उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि बच्चे को कानून की प्रक्रिया के सामने अकेला नहीं छोड़ा जाए। प्रशिक्षण के दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई के बाल संरक्षण पदाधिकारी विवेक रजक, परामर्शी मीनू कुमारी तथा एवीएम संस्था पूर्णिया के जिला समन्वयक संतोष कुमार दास ने योजना की विभिन्न बारीकियों और व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी。
नाबालिग को पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर डीएलएसए को देनी होगी सूचना:
प्रशिक्षण के दौरान योजना के महत्वपूर्ण प्रावधानों और एलएसयूसी की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि जब पुलिस किसी नाबालिग बच्चे को संरक्षण में लेती है तो इसकी सूचना संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) को देना महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चे को समय पर आवश्यक कानूनी सहायता मिल सके। एलएसयूसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या सामाजिक स्थिति के कारण कोई बच्चा कानूनी सहायता से वंचित न रह जाए। बच्चों से जुड़े मामलों में केवल कानूनी प्रतिनिधित्व ही नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा, गरिमा और हितों को ध्यान में रखते हुए सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संस्थान का महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण:
प्रशिक्षण में बताया गया कि बाल देखरेख संस्थानों की स्थिति और वहां रह रहे बच्चों के अधिकारों की निगरानी भी एलएसयूसी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके तहत बाल देखरेख संस्थान का कम से कम महीने में एक बार निरीक्षण किए जाने की आवश्यकता बताई गई। निरीक्षण के दौरान बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी सहायता और अन्य आवश्यक जरूरतों की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा। किसी प्रकार की समस्या सामने आने पर संबंधित स्तर पर उसके समाधान की पहल की जाएगी।
पॉक्सो पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता और मुआवजा:
प्रशिक्षण में पॉक्सो मामलों के पीड़ित बच्चों को मिलने वाली कानूनी सहायता और मुआवजा प्रक्रिया में एलएसयूसी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि यौन अपराध से प्रभावित बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया जाना है। अधिवक्ताओं और पारा विधिक स्वयंसेवकों से कहा गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में सामान्य मामलों की तरह नहीं बल्कि उनकी उम्र, मानसिक स्थिति और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर संवाद और सहायता प्रदान करें।
बच्चों तक पहुंचेगी कानूनी सहायता:
नालासा की इस योजना के तहत बच्चों तक कानूनी सेवाओं की पहुंच को केवल अदालत तक सीमित नहीं रखा गया है। एलएसयूसी को पुलिस थानों, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, बाल देखरेख संस्थानों और जेलों जैसे विभिन्न स्तरों पर बच्चों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के किसी भी चरण में सहायता की जरूरत हो तो उसे समय पर निःशुल्क विधिक सेवा मिल सके।
पुरानी योजनाओं को मिलाकर तैयार हुई नई व्यवस्था:
कार्यक्रम में बताया गया कि नालसा ने बच्चों को न्याय तक आसान और प्रभावी पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बच्चों के लिए बाल हितैषी विधिक सेवा योजना 2024 लागू की है। यह व्यवस्था पूर्व की 2015 की बाल हितैषी विधिक सेवा योजना तथा 2021 में दिव्यांग बच्चों के लिए बनाई गई विधिक सेवा योजना को समेकित करते हुए तैयार की गई है। कार्यक्रम में बच्चों और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न सहायता नंबरों के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों को नालसा सहायता नंबर 15100, बाल सहायता नंबर 1098 और दिव्यांगजन सहायता नंबर 14456 की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
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